राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने मंगलवार को असम की राजधानी गुवाहाटी में पूर्वोत्तर के युवाओं को खुला निमंत्रण दिया – “RSS को करीब से समझिए, इसके विचारों को अपनाइए और भारत को फिर से विश्वगुरु बनाइए।” खानापारा मैदान में आयोजित ‘युवा संवाद’ कार्यक्रम में करीब 25 हजार युवाओं की भीड़ के सामने भागवत ने कहा, “पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार है। यहां की संस्कृति, भाषा और परंपराएं विविध हैं, लेकिन सबका मूल एक ही है – भारतीयता। अगर यह क्षेत्र मजबूत हुआ तो पूरा देश मजबूत होगा।”
भागवत ने बिना लाग-लपेट के कहा, “कुछ लोग RSS को गलत समझते हैं। वे कहते हैं कि संघ केवल हिंदू संगठन है। अरे भाई, हिंदू कोई धर्म का नाम नहीं, यह तो जीवन पद्धति है। जो भारत में रहता है, भारत की संस्कृति को अपनाता है, वह हिंदू है – चाहे वह किसी भी जाति, भाषा या प्रदेश का हो।” उन्होंने पूर्वोत्तर की जनजातियों का उदाहरण देते हुए कहा, “यहां के बोडो, मising, कार्बी, डिमासा, नगा, मिजो – सबकी अपनी परंपराएं हैं, लेकिन सब भारत मां के पुत्र हैं। संघ इन्हें जोड़ने का काम करता है, तोड़ने का नहीं।”
सरसंघचालक ने युवाओं से तीन संकल्प लिए:
हर युवा कम से कम एक शाखा में जाए और RSS को स्वयं समझे।
अपने गांव-कस्बे में कम से कम 10 लोगों को संघ की विचारधारा से जोड़े।
2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान दे।
उन्होंने पूर्वोत्तर की सामरिक और सांस्कृतिक महत्ता पर जोर देते हुए कहा, “यह क्षेत्र चीन और बांग्लादेश से घिरा है। अगर यहां की युवा पीढ़ी जागृत हो गई तो न कोई घुसपैठ कर पाएगा, न कोई भारत मां की एकता को चुनौती दे पाएगा।” भागवत ने असम में चल रहे ‘हिंदू जागरण अभियान’ की तारीफ की और कहा, “पिछले दो साल में पूर्वोत्तर में संघ की शाखाएं 40 प्रतिशत बढ़ी हैं। यह बहुत बड़ी उपलब्धि है।”
कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा, संघ के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले और हजारों स्वयंसेवक मौजूद थे। हिमंत ने कहा, “मोहन जी के मार्गदर्शन में हम असम को नशा-मुक्त, घुसपैठ-मुक्त और हिंदुत्व-जागृत राज्य बना रहे हैं।” एक युवा स्वयंसेवक ने मंच पर आकर बताया कि वह पहले क्रिश्चियन मिशनरी स्कूल में पढ़ता था और उसे हिंदू धर्म के बारे में गलत बताया जाता था, लेकिन संघ की शाखा में आने के बाद उसे अपनी जड़ें समझ आईं।
भागवत ने अंत में युवाओं से अपील की, “आज का युवा मोबाइल और इंटरनेट में खोया है। मैं कहता हूं – एक घंटा रोज शाखा को दो, बाकी 23 घंटे तुम्हारे। लेकिन वह एक घंटा तुम्हारी जिंदगी बदल देगा।” कार्यक्रम के बाद सोशल मीडिया पर #UnderstandRSS ट्रेंड करने लगा। कई युवाओं ने लिखा, “पहली बार किसी ने इतनी साफ-साफ बात की। अब शाखा जरूर जाऊंगा।”
गुवाहाटी से लौटते वक्त भागवत ने पत्रकारों से कहा, “पूर्वोत्तर भारत का दिल है। जब तक यह दिल मजबूत नहीं होगा, भारत विश्वगुरु नहीं बन सकता।” यह कार्यक्रम असम में 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले संघ की बढ़ती सक्रियता का संकेत माना जा रहा है।
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