बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना और उनके मंत्रिमंडल के पूर्व मंत्रियों सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ वर्ष 2015 में एक वकील का अपहरण करने के आरोप में बुधवार को एक मुकदमा दर्ज किया गया।
बांग्लादेश में विवादास्पद आरक्षण प्रणाली को लेकर अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध प्रदर्शन के बाद पांच अगस्त को 76 वर्षीय हसीना के इस्तीफा देने और भारत चले जाने के बाद उनके खिलाफ यह दूसरा मुकदमा है।
‘डेली स्टार’ समाचार पत्र की खबर के अनुसार, उच्चतम न्यायालय के वकील सोहेल राणा ने अपहरण के मामले में पीड़ित की ओर से अर्जी दायर की है।
ढाका की मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट फरजाना शकीला सुमु चौधरी की अदालत ने मुकदमे को स्वीकार किये जाने का आदेश दिया है।
हसीना के मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्री, जिन्हें मामले में आरोपी बनाया गया है उनमें पूर्व गृह मंत्री असद-उज-जमां खान, पूर्व कानून मंत्री अनीस-उल-हक, पूर्व पुलिस महानिरीक्षक शाहीद-उल-हक, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के महानिदेशक बेनजीर अहमद और आरएबी के 25 अज्ञात सदस्य शामिल हैं।
खबर में राणा के हवाले से कहा गया, “10 फरवरी 2015 को मुझे उत्तरा के सेक्टर पांच से हिरासत में लेकर जबरन एक वाहन में बैठा दिया गया। जैसे ही मैं कार के अंदर घुसा, मेरे कानों और गुप्तांगों में बिजली के झटके देकर मुझे करीब-करीब बेहोश कर दिया गया।”
खबर के मुताबिक, “समय के साथ-साथ कई तरह की क्रूर यातनाएं सहने के बाद मुझे आखिरकार अगस्त में राजशाही के गोदागरी में रिहा कर दिया गया।”
हसीना और छह अन्य के खिलाफ मंगलवार को, पिछले महीने हुई हिंसक झड़पों के दौरान एक किराना दुकान के मालिक की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था।
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