टीवी और मोबाइल ने बच्चों के दिल की सेहत पर बढ़ाया खतरा, रिसर्च में चौंकाने वाले नतीजे

माता-पिता के लिए यह खबर चिंता बढ़ाने वाली है। एक नई रिसर्च में खुलासा हुआ है कि टीवी, वीडियो गेम और मोबाइल स्क्रीन पर बढ़ता समय बच्चों के दिल की सेहत (Heart Health) को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहा है।
अध्ययन में पाया गया कि जिन बच्चों का “स्क्रीन टाइम” दिन में 3 घंटे से ज्यादा होता है, उनमें दिल की बीमारियों का खतरा लगभग दोगुना हो जाता है।

रिसर्च में क्या पाया गया

यह अध्ययन ब्रिटेन के Journal of Pediatric Health & Activity Science में प्रकाशित हुआ है। इसमें 8 से 16 वर्ष की उम्र के 2,000 से अधिक बच्चों को शामिल किया गया।
रिसर्चरों ने पाया कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने से बच्चों में शारीरिक निष्क्रियता (Physical Inactivity) बढ़ रही है।
इससे उनके ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल और बॉडी मास इंडेक्स (BMI) पर नकारात्मक असर पड़ा।
परिणामस्वरूप, कम उम्र में ही दिल की कार्यक्षमता घटने के संकेत मिले।

हर दिन 3 घंटे से ज़्यादा स्क्रीन टाइम = बढ़ता खतरा

रिपोर्ट के अनुसार, जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम रोज़ाना 3 घंटे या उससे अधिक था, उनमें हाई ब्लड प्रेशर का खतरा 32% और अधिक वजन (Obesity) का खतरा 45% तक बढ़ गया।
बच्चों का अधिकांश समय टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने या वीडियो देखने में बीतता है, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधि लगभग खत्म हो जाती है।

एक्सपर्ट्स की राय

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बैठे रहने और आंखों पर तेज रोशनी पड़ने से हार्मोनल असंतुलन होता है।
नींद की कमी, जंक फूड की आदत और मानसिक तनाव भी इस समस्या को और बढ़ा रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि स्क्रीन टाइम से सिर्फ दिल ही नहीं, बल्कि आंखें, नींद और दिमागी विकास भी प्रभावित हो रहे हैं।

दिल के विशेषज्ञ डॉक्टर बताते हैं —

“बच्चों के दिल को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है कि वे रोज़ाना कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि करें। लंबे समय तक मोबाइल या टीवी के सामने बैठना शरीर में ‘साइलेंट स्ट्रेस’ पैदा करता है, जो दिल की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।”

माता-पिता के लिए चेतावनी और सुझाव

स्क्रीन टाइम 1 घंटे तक सीमित करें।

बच्चों को आउटडोर गेम्स और खेलकूद के लिए प्रेरित करें।

खाने के समय टीवी या मोबाइल बंद रखें।

हर 30 मिनट में स्क्रीन ब्रेक दिलवाएं।

बच्चों की नींद और खानपान पर नजर रखें।

डिजिटल लत बन रही खतरा

रिसर्च में यह भी सामने आया कि जो बच्चे मोबाइल गेम्स की लत में रहते हैं, उनमें डोपामिन हार्मोन का स्तर असंतुलित हो जाता है।
यह हार्मोन आनंद और संतुष्टि से जुड़ा है — जब यह असंतुलित होता है, तो बच्चे चिड़चिड़े और मानसिक रूप से थके हुए महसूस करते हैं।
लंबे समय में यह स्थिति दिल और दिमाग दोनों के लिए नुकसानदेह बन सकती है।

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