अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास को लेकर एक सख्त और स्पष्ट संदेश दिया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ट्रंप ने कहा कि अगर हमास बंधकों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल करता है, तो उसे अब किसी भी तरह की रियायत या दया की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
ट्रंप के इस बयान को इज़रायल-गाजा संघर्ष के मौजूदा हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय दबाव और अमेरिकी राजनीति की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। आने वाले अमेरिकी चुनावों में राष्ट्रीय सुरक्षा और पश्चिम एशिया की नीति एक बड़ा मुद्दा बनते दिख रहे हैं।
“बंधकों की आड़ में छिपने वालों को बख्शा नहीं जाएगा”
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा:
“यदि हमास बंधकों को मानव ढाल बनाकर कार्रवाई रोकने की कोशिश करता है, तो उसे यह समझ लेना चाहिए कि अमेरिका अब कोई नरमी नहीं दिखाएगा। हम हर जरूरी कदम उठाने को तैयार हैं।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि ऐसे कृत्य न केवल अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानूनों का उल्लंघन हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं।
चुनावी रणनीति या सुरक्षा का संदेश?
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वे 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार अभियान चला रहे हैं। उनके समर्थकों के अनुसार, यह बयान राष्ट्रीय सुरक्षा पर उनकी स्पष्ट और सख्त नीति को दर्शाता है।
हालांकि, कुछ आलोचक इसे चुनावी लाभ के लिए उठाया गया कदम मानते हैं, ताकि यह दिखाया जा सके कि ट्रंप “कमज़ोर” नहीं हैं और वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने को तैयार हैं।
हमास पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा
गौरतलब है कि हाल के सप्ताहों में गाजा पट्टी में तनाव बढ़ा है। इज़रायल की जवाबी कार्रवाई में कई नागरिक हताहत हुए हैं, जबकि हमास ने विदेशी नागरिकों और इज़रायली लोगों को बंधक बना लिया है। इन्हीं घटनाओं को लेकर ट्रंप ने हमास को चेताया है कि बंधकों को ढाल बनाना युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है।
अमेरिका की नीति में बदलाव?
ट्रंप के इस कड़े रुख से संकेत मिलते हैं कि यदि वे दोबारा सत्ता में आते हैं, तो अमेरिका की विदेश नीति विशेष रूप से पश्चिम एशिया में और अधिक आक्रामक हो सकती है। इससे इज़रायल को स्पष्ट समर्थन मिलेगा और आतंकी संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत मजबूत होंगे।
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