तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने की सभी कोशिशें नाकाम हो रही थीं, लेकिन फिर डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनावी प्रचार के दौरान युद्ध खत्म करने का वादा किया। राष्ट्रपति पद संभालते ही ट्रंप ने अपने वादे को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया और मंगलवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत के बाद अस्थायी युद्ध विराम का ऐलान कर दिया।
ट्रंप की पहल पर दुनिया की नजर
ट्रंप के इस फैसले की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है।
कुछ लोग इसे ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं, जिससे यूरोप में शांति की उम्मीद जगी है।
कुछ आलोचक इसे अमेरिका द्वारा यूक्रेन को धोखा देने और रूस के आगे झुकने की रणनीति बता रहे हैं।
युद्ध के कारण अब तक 20 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, और पूरा यूरोप इस संकट से प्रभावित हुआ है।
अगर यह युद्ध विराम लंबे समय तक कायम रहता है, तो ट्रंप को शांति के लिए नोबेल पुरस्कार मिलने की संभावना बढ़ सकती है।
क्या ट्रंप को मिलेगा नोबेल? इतिहास से मिल रही है प्रेरणा
यह पहली बार नहीं होगा जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति को शांति का नोबेल पुरस्कार मिलेगा।
1906 में थियोडोर रूजवेल्ट को जापान-रूस युद्ध खत्म करवाने के लिए नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
2009 में बराक ओबामा को भी अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए यह पुरस्कार मिला था।
अब रूस-यूक्रेन युद्ध विराम की पहल के चलते ट्रंप भी इस सम्मान की दौड़ में शामिल हो सकते हैं।
नोबेल पुरस्कार क्यों दिया जाता है?
नोबेल पुरस्कार उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने मानवता के लाभ के लिए विशेष योगदान दिया हो।
यह पुरस्कार 6 श्रेणियों में दिया जाता है:
भौतिकी
रसायन विज्ञान
चिकित्सा विज्ञान
साहित्य
अर्थशास्त्र
शांति
शांति का नोबेल पुरस्कार राष्ट्रों के बीच भाईचारे को बढ़ावा देने, सेनाओं को कम करने और शांति सम्मेलनों को प्रोत्साहित करने के लिए दिया जाता है।
क्या ट्रंप वाकई नोबेल के हकदार हैं?
संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित अन्य वैश्विक संगठन रूस-यूक्रेन युद्ध रोकने में असफल रहे थे।
ट्रंप ने खुद दावा किया था कि अगर युद्ध रुकता है, तो उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार मिल सकता है।
वह मिडिल ईस्ट में भी शांति स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं, खासतौर पर गाजा और इजराइल के बीच समझौते के प्रयास में लगे हुए हैं।
युद्ध विराम का भविष्य क्या है?
अस्थायी युद्ध विराम लागू हो चुका है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह स्थायी रहेगा?
यदि रूस और यूक्रेन के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है, तो यह पहल कमजोर पड़ सकती है।
अगर ट्रंप इस संघर्ष को स्थायी शांति समझौते में बदलने में सफल होते हैं, तो उनकी नोबेल पुरस्कार की दावेदारी और मजबूत हो जाएगी।
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