पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति और 2024 चुनाव के प्रमुख रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने पुराने तेवर में नजर आ रहे हैं। इस बार निशाना बना है भारत, जहां से जुड़ी 9 कंपनियों और 8 भारतीय नागरिकों पर अमेरिकी प्रशासन ने प्रतिबंध (Sanctions) लगा दिए हैं।
इस कार्रवाई के पीछे जो वजह बताई जा रही है, वह है – अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का उल्लंघन, विशेषकर ईरान और रूस से व्यापारिक संबंधों को लेकर।
कौन हैं प्रतिबंधित कंपनियां और व्यक्ति?
हालांकि अमेरिकी विदेश विभाग ने सभी नामों को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन शुरुआती जानकारी के अनुसार, ये कंपनियां पेट्रोकेमिकल ट्रेड, ड्यूल-यूज़ टेक्नोलॉजी, और मिलिट्री ग्रेड उपकरणों के एक्सपोर्ट में शामिल रही हैं। कुछ कंपनियां ईरान से जुड़े तेल आयात और पुनः निर्यात से संबंधित पाई गईं, वहीं कुछ ने रूस के लिए संवेदनशील तकनीकी उपकरणों की आपूर्ति की।
सूत्रों के अनुसार, ये सभी कार्रवाइयां अमेरिका के IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) और CAATSA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) कानूनों के तहत की गई हैं।
🇮🇳 भारत पर ट्रंप की ‘खुन्नस’ या कूटनीतिक दबाव?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह कदम केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी हो सकता है।
विदेश नीति मामलों के विश्लेषक डॉ. मोहित रंजन कहते हैं,
“ट्रंप प्रशासन भारत को एक रणनीतिक साझेदार मानते रहे हैं, लेकिन जब बात अमेरिका के कानूनों और उसके ‘पहले अमेरिका’ एजेंडा की होती है, तो वे कोई रियायत नहीं देते।”
यह भी माना जा रहा है कि ट्रंप चीन और रूस पर दबाव बनाने के क्रम में भारत को एक मिडल पावर की तरह ट्रीट कर रहे हैं, जहां सहयोग के साथ-साथ नियंत्रण और चेतावनी की नीति भी अपनाई जा रही है।
भारत की प्रतिक्रिया?
भारत सरकार की ओर से अब तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय के उच्च सूत्रों ने संकेत दिए हैं कि मामले की कूटनीतिक स्तर पर समीक्षा की जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब भारतीय कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों की जद में आई हों, लेकिन एक साथ 9 कंपनियों और 8 व्यक्तियों पर कार्रवाई एक असाधारण मामला है।
असर क्या होगा?
इन कंपनियों की अमेरिका से ट्रेडिंग पर रोक लगेगी
बैंकिंग और फंड ट्रांसफर में दिक्कत आ सकती है
अन्य वैश्विक कंपनियां भी सतर्क हो सकती हैं
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में असहजता संभव
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