आजकल लंबे समय तक बैठकर काम करना, मोबाइल और लैपटॉप का ज्यादा इस्तेमाल और गलत पोश्चर के कारण लोगों में स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इसमें शरीर का एक हिस्सा दूसरे की तुलना में ज्यादा झुक जाता है या टेढ़ा नजर आने लगता है, जिससे गर्दन, कमर और कंधों में दर्द रहने लगता है।
स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस क्या होता है?
जब शरीर की मांसपेशियां और हड्डियां एक समान संतुलन में काम नहीं करतीं, तो उसे स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस कहा जाता है। इसका असर रीढ़ की हड्डी, कंधों और पेल्विक एरिया पर ज्यादा पड़ता है।
क्यों होती है यह समस्या?
लगातार गलत तरीके से बैठना, एक कंधे पर भारी बैग लटकाना, झुककर मोबाइल चलाना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी इसके मुख्य कारण हैं। समय के साथ यह आदतें शरीर की बनावट को बिगाड़ देती हैं।
राहत पाने के आसान टिप्स
रोजाना हल्की स्ट्रेचिंग और योगासन करना फायदेमंद हो सकता है। ताड़ासन, भुजंगासन और सेतुबंधासन जैसे योगासन शरीर को सीधा रखने में मदद करते हैं।
बैठते समय पीठ सीधी रखें और स्क्रीन को आंखों के लेवल पर रखें।
हर 30–40 मिनट में उठकर थोड़ा चलना और शरीर को स्ट्रेच करना जरूरी है।
सोते समय बहुत ऊंचा तकिया लगाने से बचें और सीधी करवट में सोने की कोशिश करें।
खानपान का भी रखें ध्यान
हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन D से भरपूर आहार लें। दूध, दही, हरी सब्जियां और धूप में बैठना इसमें मददगार हो सकता है।
कब डॉक्टर से मिलें?
अगर दर्द लगातार बना रहे, शरीर टेढ़ा नजर आने लगे या चलने-फिरने में दिक्कत हो, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना जरूरी है।
स्ट्रक्चरल इम्बैलेंस एक दिन में नहीं होता, बल्कि गलत आदतों से धीरे-धीरे बढ़ता है। सही पोश्चर, नियमित एक्सरसाइज और हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर इस समस्या से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।
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