राजधानी दिल्ली और एनसीआर एक बार फिर जहरीली हवा की गिरफ्त में है। एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार “गंभीर” श्रेणी में पहुंच चुका है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रदूषित हवा का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों, बच्चों और सांस की बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर पड़ता है। खासतौर पर वरिष्ठ नागरिकों को इस मौसम में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
बुजुर्गों पर प्रदूषण का असर ज्यादा क्यों?
डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ फेफड़ों की क्षमता घटती जाती है। इसके अलावा, अधिकतर बुजुर्ग पहले से ही हृदय, फेफड़ों या ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे होते हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद PM 2.5 और PM 10 जैसे कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर ऑक्सीजन का प्रवाह घटा देते हैं, जिससे सांस फूलना, थकान, खांसी और छाती में जकड़न जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं।
एम्स दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राजेश चोपड़ा कहते हैं, “इस मौसम में हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता पर सीधा असर डालते हैं। बुजुर्गों को कोशिश करनी चाहिए कि सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें और घर में वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखें।”
🌫️ बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए जरूरी 7 टिप्स
1. घर के अंदर रहें:
सुबह और शाम के समय जब प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, तब बाहर निकलने से बचें। जरूरत पड़ने पर मास्क (N95 या N99) जरूर पहनें।
2. एयर प्यूरिफायर का इस्तेमाल करें:
कमरे में एयर प्यूरिफायर लगाने से PM 2.5 जैसे महीन कणों को कम किया जा सकता है। अगर प्यूरिफायर न हो, तो खिड़कियों पर गीले कपड़े लगाना भी कारगर उपाय है।
3. हाइड्रेशन बनाए रखें:
दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं। यह शरीर में मौजूद प्रदूषक तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है।
4. पौष्टिक आहार लें:
डाइट में विटामिन C, ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें शामिल करें — जैसे आंवला, अदरक, हल्दी, पालक और अखरोट। ये फेफड़ों की रक्षा करते हैं।
5. सांस के मरीज दवा समय पर लें:
अगर किसी बुजुर्ग को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सीओपीडी जैसी समस्या है, तो इनहेलर या नेबुलाइज़र का उपयोग डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित करें।
6. घर में ग्रीन प्लांट लगाएं:
एलोवेरा, स्पाइडर प्लांट, स्नेक प्लांट जैसे पौधे हवा की गुणवत्ता सुधारने में मदद करते हैं।
7. नियमित जांच कराएं:
इस मौसम में ब्लड प्रेशर, ऑक्सीजन लेवल और पल्स की मॉनिटरिंग जरूरी है। किसी भी असामान्य लक्षण — जैसे सांस फूलना या लगातार खांसी — दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
विशेषज्ञों की राय
पल्मोनोलॉजिस्ट का कहना है, “दिल्ली-एनसीआर में इस समय वायु प्रदूषण गंभीर स्तर पर है। बुजुर्गों को बिना आवश्यकता बाहर नहीं निकलना चाहिए और घर में ताजी हवा बनाए रखने के लिए पौधे लगाना व नियमित वेंटिलेशन जरूरी है।”
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