माहवारी के दौरान एक्सरसाइज करें या न करें? विज्ञान और विशेषज्ञ क्या कहते हैं

पीरियड्स यानी मासिक धर्म महिलाओं की दिनचर्या का एक प्राकृतिक हिस्सा है। इस दौरान शरीर हार्मोनल बदलावों से गुजरता है, जिससे थकान, मूड स्विंग्स, पेट दर्द और सुस्ती जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। ऐसे में एक सवाल बार-बार सामने आता है — क्या इस समय वर्कआउट करना सुरक्षित है? या फिर बेहतर यही है कि शरीर को आराम दिया जाए?

इस विषय पर कई तरह की धारणाएं हैं, लेकिन विशेषज्ञों और मेडिकल रिसर्च की मानें तो सही वर्कआउट न केवल सेफ है, बल्कि लाभकारी भी साबित हो सकता है।

वर्कआउट करना है पूरी तरह सेफ

फिजिकल मेडिसिन और वुमन हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. सौम्या गुप्ता के अनुसार,
“पीरियड्स के दौरान एक्सरसाइज पूरी तरह सुरक्षित है। यहां तक कि हल्की-फुल्की एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग, योग या स्ट्रेचिंग से ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है और क्रैम्प्स में भी राहत मिलती है।”

कुछ केसों में, जहां पीरियड्स अत्यधिक दर्दनाक होते हैं या कमजोरी महसूस होती है, वहां डॉक्टर से सलाह लेकर ही एक्टिविटी करनी चाहिए।

ये फायदे भी हैं पीरियड्स में एक्सरसाइज करने के

क्रैम्प्स में राहत: हल्की वॉकिंग या योगा ब्लड फ्लो बेहतर करती है, जिससे ऐंठन कम होती है।

मूड बेहतर होता है: एक्सरसाइज के दौरान शरीर में एंडोर्फिन नामक ‘फील-गुड’ हार्मोन रिलीज़ होता है, जिससे स्ट्रेस कम होता है।

थकान में कमी: हल्का वर्कआउट शरीर को एनर्जी देने में मदद करता है।

नींद बेहतर होती है: पीरियड्स के दौरान नींद में खलल आना आम है, लेकिन एक्सरसाइज से नींद की गुणवत्ता सुधरती है।

किन एक्सरसाइज से करें शुरुआत?

ब्रिस्क वॉक या धीमी रनिंग

जेंटल योगासन (जैसे बालासन, सेतुबंधासन)

पिलेट्स

लाइट स्ट्रेचिंग

साइकलिंग या स्वीमिंग (यदि सहज महसूस करें)

ध्यान रखें कि हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट या वेट लिफ्टिंग यदि बहुत अधिक थकावट दे रही है तो उसे टालना बेहतर है।

क्या न करें?

जब शरीर बहुत अधिक थका हुआ हो या सिरदर्द हो, तो खुद पर दबाव न डालें।

डिहाइड्रेशन से बचें, खूब पानी पिएं।

शरीर के संकेतों को समझें—अगर चक्कर, मरोड़ या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो, तो वर्कआउट तुरंत रोक दें।

एक्सपर्ट की सलाह

डॉ. बताती हैं,
“हर महिला का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया करता है। कुछ महिलाओं को पहले दो दिन में आराम करना बेहतर लगता है, तो कुछ के लिए हल्की फिजिकल एक्टिविटी ही राहत का जरिया बनती है। ज़रूरी है अपने शरीर की बात सुनना और उसी अनुसार दिनचर्या तय करना।”

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