आजकल थायरॉइड एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है।गलत खानपान, तनाव और अनियमित दिनचर्या इसकी मुख्य वजह हैं।लेकिन अच्छी बात यह है कि इसे दवाइयों के साथ-साथ योग के नियमित अभ्यास से भी कंट्रोल किया जा सकता है।
योगासन शरीर की एंडोक्राइन ग्रंथियों को संतुलित करते हैं और हार्मोनल इंबैलेंस को कम करने में मदद करते हैं।
यहाँ जानिए 4 आसान योगासन, जो थायरॉइड को प्राकृतिक रूप से संतुलित रखने में मदद कर सकते हैं
1. सर्वांगासन (Sarvangasana)
फायदे:
- इसे “शरीर की रानी” कहा जाता है क्योंकि यह पूरे शरीर पर असर डालता है।
- यह थायरॉइड ग्रंथि को एक्टिव करता है और हार्मोन का स्राव नियंत्रित करता है।
- रक्त संचार को बेहतर बनाता है और गले के क्षेत्र में प्रेशर डालकर ग्रंथि को उत्तेजित करता है।
कैसे करें:
- पीठ के बल लेट जाएँ।
- धीरे-धीरे दोनों पैर उठाकर ऊपर करें।
- कमर को हाथों से सहारा दें और शरीर को सीधा करें।
- कुछ सेकंड रुककर धीरे-धीरे वापस लेट जाएँ।
सावधानी:
गर्दन या ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोग इसे प्रशिक्षक की देखरेख में करें।
2. मत्स्यासन (Matsyasana)
फायदे:
- थायरॉइड और पेराथायरॉइड ग्रंथियों को उत्तेजित करता है।
- गले और छाती की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
- पाचन और सांस की दिक्कतों में भी राहत देता है।
कैसे करें:
- पद्मासन में बैठें और पीछे की ओर लेट जाएँ।
- सिर को पीछे झुकाएँ ताकि गर्दन पर हल्का खिंचाव महसूस हो।
- हाथों को जांघों के पास रखें और 15–20 सेकंड तक मुद्रा में रहें।
3. भुजंगासन (Bhujangasana)
फायदे:
- गले और छाती के क्षेत्र में रक्त प्रवाह को बढ़ाता है।
- थायरॉइड और एड्रेनल ग्रंथियों के कार्य को संतुलित रखता है।
- तनाव और थकान को कम करता है।
कैसे करें:
- पेट के बल लेट जाएँ, हथेलियाँ कंधों के पास रखें।
- सांस लेते हुए सिर और छाती को ऊपर उठाएँ।
- कोहनियों को थोड़ा मोड़कर रखें और 20 सेकंड तक इस स्थिति में रहें।
4. हलासन (Halasana)
फायदे:
- थायरॉइड ग्रंथि पर सीधा असर डालता है।
- शरीर से टॉक्सिन्स निकालने और मेटाबॉलिज़्म को बढ़ाने में मदद करता है।
- पीठ, गर्दन और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
कैसे करें:
- पीठ के बल लेट जाएँ और पैर धीरे-धीरे सिर के पीछे की ओर ले जाएँ।
- पैर की उंगलियाँ ज़मीन को छूने दें।
- कुछ सेकंड रुककर सामान्य स्थिति में लौट आएँ।
अतिरिक्त सुझाव
- रोज़ाना 15–20 मिनट इन आसनों का अभ्यास करें।
- सुबह खाली पेट योग करना सबसे अच्छा माना जाता है।
- प्राणायाम (जैसे कपालभाति और उज्जायी) को भी दिनचर्या में शामिल करें।
- योग के साथ-साथ संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त दिनचर्या बनाए रखें।
थायरॉइड जैसी समस्या को दवाओं के अलावा योग से भी काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
सर्वांगासन, मत्स्यासन, भुजंगासन और हलासन जैसे आसन हार्मोनल बैलेंस को दुरुस्त रखते हैं और शरीर को स्वाभाविक रूप से स्वस्थ बनाते हैं।थोड़ी नियमितता और धैर्य से आप थायरॉइड पर नियंत्रण पा सकते हैं — बिना किसी साइड इफेक्ट के! 🌿
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