थायराइड एक सामान्य लेकिन गंभीर हार्मोनल समस्या है, जो शरीर में थायरॉयड ग्लैंड द्वारा उत्पादन होने वाले हार्मोन की कमी या अधिकता के कारण होती है। भारत में करीब 10 में से 1 व्यक्ति इस बीमारी से प्रभावित है। समय पर पहचान और सही परहेज से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।
थायराइड के प्रकार
- हाइपोथायरायडिज़्म (Hypothyroidism)
- थायरॉयड हार्मोन कम बनने से शरीर की गतिविधियाँ धीमी हो जाती हैं।
- हाइपरथायरायडिज़्म (Hyperthyroidism)
- थायरॉयड हार्मोन अधिक बनने से शरीर की गतिविधियाँ अत्यधिक तेज हो जाती हैं।
शुरुआती लक्षण
हाइपोथायरायडिज़्म के लक्षण:
- लगातार थकान और कमजोरी
- वजन बढ़ना और भूख कम लगना
- ठंड अधिक लगना, त्वचा का रूखापन
- बालों का झड़ना, चेहरे पर सूजन
हाइपरथायरायडिज़्म के लक्षण:
- तेज़ धड़कन और हाथ-पाँव का कंपन
- अनियंत्रित वजन घटना
- ज्यादा पसीना आना और नींद में कमी
- घबराहट और चिड़चिड़ापन
थायराइड के लिए परहेज और उपाय
- संतुलित आहार
- आयोडीन युक्त नमक का प्रयोग
- अत्यधिक गोभी, सोयाबीन और पैकेज्ड फूड से बचें (कच्चा सेवन हाइपोथायरायडिज़्म में)।
- नियमित व्यायाम
- हल्की एक्सरसाइज या योग मेटाबॉलिज्म और हार्मोन संतुलन में मदद करता है।
- तनाव कम करें
- ध्यान, प्राणायाम और पर्याप्त नींद से हार्मोनल संतुलन बेहतर रहता है।
- नियमित जांच
- 6 महीने या 1 साल पर थायरॉयड लेवल की जांच कराएँ।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवा लें।
- कैफीन और जंक फूड कम करें
- चाय, कॉफी और प्रोसेस्ड फूड से थायराइड असंतुलित हो सकता है।
थायराइड को अनदेखा करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
- शुरुआती लक्षणों को पहचानें
- संतुलित आहार और व्यायाम अपनाएँ
- समय पर डॉक्टर से परामर्श करें
याद रखें: जानकारी और सावधानी ही थायराइड से बचाव की कुंजी है।
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