पैरों में दिखने वाले ये लक्षण बन सकते हैं हार्ट अटैक का पूर्व संकेत, डॉक्टरों की राय जानना है जरूरी

दिल की बीमारियाँ अब सिर्फ उम्रदराज़ लोगों तक सीमित नहीं रहीं। तेजी से बदलती जीवनशैली और बढ़ता तनाव युवा पीढ़ी को भी हृदय रोगों की ओर धकेल रहा है। आमतौर पर लोग हार्ट अटैक के लक्षण सीने में दर्द, सांस फूलना या पसीना आने तक ही सीमित मानते हैं। लेकिन चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर खासकर पैरों में आने वाले कुछ बदलाव भी दिल की खराब होती सेहत की ओर इशारा कर सकते हैं।

एक हालिया हेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, करीब 46% लोग ऐसे लक्षणों को पहचान ही नहीं पाते, जिन्हें शुरुआती चेतावनी के रूप में देखा जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन संकेतों को समझ लिया जाए, तो हार्ट अटैक जैसी घातक स्थितियों से बचा जा सकता है।

हार्ट अटैक से पहले पैरों में दिखने वाले संकेत:
1. पैरों में सूजन (Swelling in Feet & Ankles):

दिल जब सही तरीके से खून पंप नहीं कर पाता, तो शरीर के निचले हिस्सों — खासकर पैरों और टखनों में सूजन आने लगती है। यह फ्लूइड रिटेंशन का संकेत हो सकता है।

2. पैरों का ठंडा रहना:

यदि पैरों की त्वचा सामान्य से ज़्यादा ठंडी महसूस हो रही है, तो यह ब्लड सर्कुलेशन में गड़बड़ी का संकेत हो सकता है, जो हार्ट फेलियर की ओर इशारा करता है।

3. पैरों की त्वचा का नीला या बैंगनी पड़ना:

खून का प्रवाह अगर पूरी तरह से नहीं हो पा रहा है, तो ऑक्सीजन की कमी से त्वचा का रंग बदल सकता है। यह स्थिति गंभीर हृदय रोगों से जुड़ी हो सकती है।

4. अचानक तेज दर्द या ऐंठन (Especially चलते वक्त):

पैरों में चलते समय दर्द या ऐंठन होना पैरीफेरल आर्टरी डिजीज (PAD) का संकेत हो सकता है, जो दिल की बीमारियों से सीधा जुड़ा होता है।

5. पैरों की नसों का उभर आना और भारीपन महसूस होना:

लगातार भारीपन, थकान या नसों में खिंचाव जैसी अनुभूति को भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

“हमारे शरीर में ब्लड सर्कुलेशन का सीधा संबंध दिल की सेहत से होता है। जब दिल कमजोर होता है, तो सबसे पहले असर पैरों जैसे सिरे वाले अंगों पर दिखता है। पैरों में सूजन, ठंडापन या रंग में बदलाव को सामान्य समझकर टालना नहीं चाहिए,”

सावधानी और समाधान:

किसी भी असामान्य लक्षण को हल्के में न लें।

नियमित रूप से बीपी, कोलेस्ट्रॉल और शुगर की जांच कराएं।

दिल की सेहत के लिए संतुलित आहार, व्यायाम और पर्याप्त नींद जरूरी है।

धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।

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