ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर आपातकालीन स्थिति है, जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह रुक जाने या रक्तस्राव की वजह से होता है। स्ट्रोक के समय पर पहचान और तुरंत इलाज ही मरीज की जान और सामान्य जीवन लौटाने में सबसे बड़ा कारक है।
“गोल्डन ऑवर” – ये घंटे तय करते हैं जिंदगी
विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक के 3–4 घंटे के अंदर अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।
इस समय सीमा के भीतर इलाज मिलने पर मस्तिष्क की क्षति को कम किया जा सकता है।
देर होने पर मरीज में स्थायी विकलांगता या गंभीर जटिलताएँ हो सकती हैं।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण
- चेहरे की कमजोरी या झुकाव
अचानक चेहरे के एक तरफ कमजोरी या झुकाव होना।
- हाथ या पैर में कमजोरी
किसी एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।
- बोलने या समझने में कठिनाई
अचानक शब्दों को सही तरीके से न बोल पाना या बातें समझने में परेशानी।
- आँखों या दृष्टि में समस्या
अचानक धुंधला दिखना या दृष्टि का प्रभावित होना।
- सिर दर्द और चक्कर
बिना किसी वजह के तीव्र सिरदर्द या संतुलन खोना।
फौरन क्या करें
- तुरंत अस्पताल पहुँचें
लक्षण दिखते ही समय बर्बाद न करें।
स्ट्रोक सेंटर या नज़दीकी आपातकालीन सेवा को कॉल करें।
- खुद से न चलें, एम्बुलेंस का उपयोग करें
एम्बुलेंस में अस्पताल पहुँचाने से समय की बचत और प्राथमिक उपचार तुरंत शुरू हो सकता है।
- शांति बनाए रखें
मरीज को अधिक हिलाएँ या तनाव न दें।
प्रारंभिक जांच और उपचार के लिए डॉक्टर का मार्गदर्शन लें।
ब्रेन स्ट्रोक में समय सबसे बड़ा इलाज है।
पहले 3–4 घंटे को ही “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है।
समय पर अस्पताल पहुँचकर इलाज लेने से मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सकता है।
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