आज स्मार्टफोन हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है — संचार, बैंकिंग, मनोरंजन से लेकर शिक्षा तक हर कार्य में इसकी भूमिका बढ़ती जा रही है। लेकिन स्मार्टफोन की सबसे नाजुक और महंगी चीज़ होती है इसकी स्क्रीन।
हर साल लाखों यूज़र्स अपनी फोन स्क्रीन के टूटने की शिकायत करते हैं। स्क्रीन रिप्लेसमेंट की लागत बढ़ती जा रही है, खासकर हाई-एंड फोनों में जहां यह खर्च ₹10,000 से ₹25,000 तक भी जा सकता है।
तकनीकी विशेषज्ञों के मुताबिक, फोन की स्क्रीन टूटने के पीछे अधिकतर मामलों में कुछ आम लेकिन अनदेखी की गई गलतियां होती हैं — जिनसे थोड़ी सावधानी रखकर बचा जा सकता है।
जानिए वे आम गलतियां जो फोन स्क्रीन को खतरे में डालती हैं
1. कवर या स्क्रीन गार्ड न लगाना
कई लोग सोचते हैं कि उनका फोन “गोरिल्ला ग्लास” या “स्ट्रॉन्ग बिल्ड” के साथ आता है, इसलिए उन्हें प्रोटेक्शन की ज़रूरत नहीं।
लेकिन गिरने के समय ग्लास पर पड़ने वाला दबाव इतना अधिक होता है कि बिना प्रोटेक्शन के स्क्रीन टूटना लगभग तय है।
2. फोन को पीछे की पॉकेट में रखना
ये आदत न सिर्फ स्क्रीन के लिए बल्कि पूरे फोन के लिए ख़तरनाक है। बैठने पर दबाव पड़ता है, जिससे स्क्रीन पर Hairline cracks या पूरी तरह ब्रेक होने का खतरा रहता है।
3. चार्जिंग के दौरान फोन का इस्तेमाल
चार्जिंग पर लगे फोन का तापमान बढ़ जाता है। इस दौरान ज़्यादा टच करने, गेम खेलने या कॉल पर लंबे समय तक बात करने से स्क्रीन पर दबाव और हीट दोनों का असर पड़ता है, जिससे स्क्रीन फट सकती है।
4. फोन को बिस्तर या कुर्सी पर लापरवाही से छोड़ देना
ऐसा कई बार होता है कि हम अनजाने में फोन पर बैठ जाते हैं, या वह गिर जाता है। इससे स्क्रीन या बैक पैनल डैमेज हो सकता है।
5. फोन को बैग में चाबियों या सिक्कों के साथ रखना
चाबियों या अन्य धारदार वस्तुओं के साथ फोन रखने से स्क्रीन पर स्क्रैच आ सकते हैं। धीरे-धीरे ये स्क्रैच माइक्रो फ्रैक्चर में बदल सकते हैं, जो समय के साथ स्क्रीन टूटने का कारण बनते हैं।
कैसे करें स्क्रीन की सुरक्षा?
हमेशा टेम्पर्ड ग्लास और मजबूत कवर का उपयोग करें
फोन को गिरने से बचाने के लिए दोनों हाथों से पकड़ें
फोन को ज़्यादा गर्म न होने दें
रात को सोने से पहले फोन को सिरहाने नहीं बल्कि मेज पर रखें
बैग में अलग जेब में फोन रखें
विशेषज्ञों की राय
मोबाइल रिपेयर टेक्नीशियन कहते हैं, “फोन टूटने के अधिकतर मामले लापरवाही के कारण होते हैं। यदि हर यूज़र थोड़ा सा ध्यान दे, तो स्क्रीन डैमेज का खतरा 70% तक कम किया जा सकता है।”
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