खाना बनाते समय तेल का चयन स्वास्थ्य पर सीधा असर डालता है। सब्जी, दाल, पराठा या पूरियां—हर प्रकार के पकवान के लिए सही तेल का इस्तेमाल जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेल का सही चुनाव स्वास्थ्य, हृदय और वजन नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि गलत तेल से कई बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
सब्जी बनाने के लिए तेल:
सरसों का तेल: उत्तर भारत में आमतौर पर सब्जियों के लिए इस्तेमाल होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट और ओमेगा-3 फैटी एसिड होते हैं, जो हृदय के लिए लाभकारी हैं।
सिरसों या रिफाइंड सूरजमुखी तेल: हल्की और स्वाद के लिए उपयुक्त है, लेकिन उच्च तापमान पर यह पोषण कम कर सकता है।
जैतून का तेल (Extra Virgin): इसे कम तापमान पर सब्जियों में डालना सेहत के लिए लाभकारी होता है।
पूरियां और तली हुई चीजें:
तली हुई चीजों के लिए रिफाइंड तेल या कनोला ऑयल बेहतर विकल्प हैं, क्योंकि ये उच्च तापमान पर स्थिर रहते हैं।
नारियल तेल भी कुछ मामलों में उपयुक्त माना जाता है, लेकिन इसे लगातार खाने से कैलोरी बढ़ सकती है।
खतरनाक और बचने योग्य तेल:
हाइड्रोजनेटेड या ट्रांस फैट युक्त तेल (जैसे कुछ ब्रांडेड बेकिंग ऑयल) स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।
बहुत बार प्रयोग किया गया तेल भी हृदय और लीवर के लिए खतरा बन सकता है।
तेल को लंबे समय तक स्टोर करने से ऑक्सीकरण होता है, जिससे इसकी गुणवत्ता घट जाती है और यह शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
तेल का तापमान और इस्तेमाल:
कम तापमान पर पकाने के लिए जैतून, सरसों या तिल का तेल अच्छा है।
उच्च तापमान पर तलने के लिए रिफाइंड सूरजमुखी, कनोला या मूंगफली का तेल सुरक्षित माना जाता है।
तेल को बार-बार गर्म करने से इसके पोषक तत्व कम हो जाते हैं और ट्रांस फैट की मात्रा बढ़ती है।
विशेषज्ञ सलाह:
हर दिन तेल की मात्रा 2–3 चम्मच से अधिक न हो।
सलाद, सब्जी और पकवान में अलग-अलग प्रकार के तेल का संतुलित उपयोग करें।
प्राकृतिक और ठंडे प्रेस किए गए तेलों को प्राथमिकता दें।
कुल मिलाकर, तेल का चुनाव केवल स्वाद का मसला नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य का अहम हिस्सा है। सही तेल चुनकर न केवल हृदय को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि वजन नियंत्रित करने, कोलेस्ट्रॉल घटाने और समग्र स्वास्थ्य सुधारने में भी मदद मिलती है।
सही तेल का चयन करने से सब्जी, दाल, पराठा या पूरियां बनाने में स्वाद भी बढ़ता है और सेहत भी सुरक्षित रहती है। इसके अलावा, ट्रांस फैट और हानिकारक तेलों से बचकर आप लंबे समय तक हृदय और पाचन स्वास्थ्य को बनाए रख सकते हैं।
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