राज्य सरकार ने शिक्षा और कौशल विकास के क्षेत्र में एक अनोखी पहल की घोषणा की है। मुख्यमंत्री रेखा सरकार ने निर्देश दिए हैं कि तिहाड़ जेल के कैदियों द्वारा विकसित कौशल और हुनर का लाभ अब छात्रों को भी मिलेगा। यह फैसला न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देगा, बल्कि समाज में पुनर्वास और कौशल विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, राज्य के विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों को तिहाड़ के कैदियों द्वारा बनाए गए उत्पाद, हस्तशिल्प और तकनीकी कौशल के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसका उद्देश्य छात्रों में व्यावहारिक शिक्षा, क्रिएटिविटी और तकनीकी समझ को बढ़ाना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल से छात्रों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं मिलेगा, बल्कि व्यावहारिक जीवन में उपयोगी कौशल भी सीखने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री रेखा सरकार ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत कैदियों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प, मॉडल और तकनीकी उपकरण को छात्रों के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ ही, छात्रों को इन परियोजनाओं में सीधे शामिल होकर उन्हें सीखने और अभ्यास करने का अवसर भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल कैदियों और छात्रों दोनों के लिए लाभकारी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम शिक्षा में अनुभवात्मक और व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। छात्रों को इस तरह के अभ्यास से रचनात्मक सोच, टीम वर्क और समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने में मदद मिलेगी। साथ ही, यह पहल कैदियों के सामाजिक पुनर्वास और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करेगी।
सरकार ने यह भी बताया कि इस पहल के लिए विशेष कार्यशालाएं और ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें कैदियों के प्रशिक्षक और विशेषज्ञ छात्रों को मार्गदर्शन देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना केवल शैक्षणिक विकास के लिए ही नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और इंसानियत की भावना को बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
सार्वजनिक प्रतिक्रिया में इस पहल को सकारात्मक रूप से देखा जा रहा है। नागरिकों का मानना है कि इससे छात्रों को जीवन में व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा और उन्हें सामाजिक जिम्मेदारी और अनुशासन के मूल्य समझ में आएंगे। इसके साथ ही, यह पहल कैदियों को समाज में सकारात्मक योगदान देने का अवसर भी प्रदान करती है।
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