पिछले कुछ सालों में डायबिटीज (मधुमेह) के मामलों में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई है। भारत जैसे देश में यह समस्या और भी गंभीर होती जा रही है, जिसका मुख्य कारण बदलती लाइफस्टाइल, खराब खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी है।
डायबिटीज दो प्रकार की होती है – टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज। आइए समझते हैं इन दोनों के बीच क्या अंतर है, इनके लक्षण और कारण क्या हैं, और किन लोगों को सबसे अधिक खतरा है।
🩺 क्या है टाइप 1 डायबिटीज?
टाइप 1 डायबिटीज एक क्रोनिक यानी दीर्घकालिक बीमारी है, जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र पैंक्रियाज की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। इसके कारण शरीर में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है।
इंसुलिन एक जरूरी हार्मोन है, जो भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं में पहुंचाने का काम करता है, जिससे शरीर को ऊर्जा मिलती है।
जब इंसुलिन नहीं बनता, तो ग्लूकोज खून में जमा हो जाता है और कोशिकाओं तक नहीं पहुंच पाता। इससे खून में शुगर लेवल खतरनाक रूप से बढ़ जाता है और कई बीमारियों का खतरा पैदा हो जाता है।
🧬 टाइप 1 डायबिटीज होने के कारण
जेनेटिक कारण (परिवार में किसी को होना)
वायरस संक्रमण
वातावरण संबंधी फैक्टर्स
कुछ स्टडीज़ के अनुसार ठंडे इलाकों में रहने वालों में इसका खतरा ज्यादा देखा गया है
📈 टाइप 1 डायबिटीज किस उम्र में होता है?
टाइप 1 डायबिटीज का खतरा खासतौर पर 4 से 7 साल और 10 से 14 साल की उम्र के बच्चों और किशोरों में ज्यादा होता है। हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है।
🚨 टाइप 1 डायबिटीज के मुख्य लक्षण
बार-बार पेशाब आना
अत्यधिक प्यास लगना
बहुत ज्यादा भूख लगना
बिना कारण वजन कम होना
थकान और कमजोरी महसूस होना
आंखों की रोशनी धुंधली होना
किसी घाव का देर से ठीक होना
🔍 क्या है टाइप 2 डायबिटीज?
टाइप 2 डायबिटीज में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं। यानी शरीर इंसुलिन बना तो रहा है, लेकिन वह प्रभावी रूप से काम नहीं कर रहा है।
समय के साथ पैंक्रियाज थक जाता है और इंसुलिन बनाना भी बंद कर सकता है, जिससे ब्लड शुगर कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। यह स्थिति ज्यादा खतरनाक हो सकती है, खासकर अगर जीवनशैली में सुधार न किया जाए।
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