फिल्ममेकर करण जौहर अपने स्पष्ट विचारों और खुलकर बात करने के अंदाज़ के लिए पहचाने जाते हैं। करियर की उपलब्धियों, निजी चुनौतियों और फैमिली लाइफ पर वह अक्सर बिना किसी हिचक के अपनी बात रखते रहे हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान करण ने सिंगल पेरेंटहुड, अपनापन और भावनात्मक अकेलेपन पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने स्वीकार किया कि जीवन की चमक-दमक और सफलता के बीच अक्सर कुछ प्रश्न अनुत्तरित रह जाते हैं, और उन्हीं प्रश्नों में companionship यानी जीवनसाथी की चाह एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
करण ने कहा कि उन्होंने जीवन में बहुत कुछ पाया—एक सफल करियर, मजबूत सामाजिक पहचान और अपने दो सुंदर बच्चों की खुशियाँ। लेकिन इसके बावजूद, कभी-कभी उनके भीतर एक खालीपन का एहसास भी उभरता है। उन्होंने बताया कि अक्सर लोग मान लेते हैं कि लोकप्रियता और सफलता इंसान को हर रूप में संपूर्ण बना देती है, जबकि वास्तविकता इससे काफी अलग होती है। “मैं अपने बच्चों के साथ बहुत खुश हूं,” उन्होंने कहा, लेकिन यह भी जोड़ा कि इंसान होने के नाते साझेदारी और भावनात्मक सहारे की इच्छा स्वाभाविक है।
सिंगल पेरेंट के रूप में बच्चों की परवरिश को लेकर करण ने कहा कि यह यात्रा जितनी संतोषजनक है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी। उन्होंने स्वीकार किया कि दो बच्चों की अकेले देखभाल, उनके भविष्य की योजना और उनके भावनात्मक विकास को लेकर जिम्मेदारी का दबाव हमेशा मौजूद रहता है। इसके बावजूद, वह मानते हैं कि माता-पिता का बंधन किसी भी कमी को भरने में सक्षम होता है। लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर एक साथी की कमी कभी-कभी महसूस होती है—ऐसा साथी जो उनके जीवन की खुशियों और कठिनाइयों को बराबरी से साझा कर सके।
करण ने यह भी कहा कि समय के साथ उन्होंने इस बात को स्वीकार करना सीख लिया है कि हर जीवन का रास्ता अलग होता है। कुछ लोगों को जीवनसाथी आसानी से मिल जाता है, कुछ को देर से, और कुछ लोग अपने परिवार को अलग तरीकों से संपूर्ण महसूस करते हैं। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि शायद “रब ने वह जोड़ी मेरे लिए नहीं बनाई,” लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि उनका जीवन अधूरा है। बल्कि, इसका मतलब है कि उनका रास्ता थोड़ा अलग है—और शायद यही रास्ता उन्हें आज की स्थिति तक लेकर आया।
भावनात्मक अकेलेपन पर बोलते हुए करण ने कहा कि यह भावना किसी भी इंसानी जीवन का हिस्सा है, चाहे वह कितना ही सफल क्यों न हो। उन्होंने माना कि सामाजिक रूप से सक्रिय रहने के बावजूद कई बार मन में वह ‘खामोशी’ रह जाती है जिसे केवल आत्ममंथन ही भर सकता है। इसी कारण उन्होंने अपने करियर और बच्चों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाया।
अंत में उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को जीवन में संतुलन खोजने की अपनी यात्रा तय करनी होती है। उनके लिए यह संतुलन आज उनके परिवार, दोस्तों और अपने काम के बीच स्थापित हुआ है। हालांकि वह मानते हैं कि companionship की इच्छा स्वाभाविक है, पर उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने वर्तमान को सुंदर और सार्थक बनाने में पूरी तरह संतुष्ट हैं।
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