मोबाइल फोन पर आने वाले हर मैसेज को लेकर सतर्क रहना पड़ता है, लेकिन अब टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने इस डर को कम करने का ठोस कदम उठाया है। 18 नवंबर 2025 को जारी अपनी नई डायरेक्टिव में TRAI ने सभी टेलीकॉम ऑपरेटर्स को सख्त निर्देश दिए हैं कि कमर्शियल एसएमएस टेम्प्लेट्स में इस्तेमाल होने वाले वेरिएबल कंपोनेंट्स – जैसे यूआरएल, ऐप डाउनलोड लिंक्स, कॉल बैक नंबर्स – को अनिवार्य रूप से प्री-टैग करना होगा। इसका मतलब है कि अब एसएमएस में आने वाले लिंक या नंबर पहले से तय और वैलिडेटेड होंगे, जिससे फिशिंग, फाइनेंशियल स्कैम और डेटा चोरी जैसे फ्रॉड पर लगाम लगेगी। यह कदम उन करोड़ों यूजर्स के लिए राहत की सांस है जो रोजाना अनचाहे मैसेजेस से परेशान हैं।
TRAI की इस पहल का आधार अनसॉलिसिटेड कमर्शियल कम्युनिकेशन (UCC) की कई जांचों से निकला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ्रॉडस्टर्स अप्रूव्ड टेम्प्लेट्स का दुरुपयोग कर रहे थे – वे बिना किसी चेक के मैलिशियस लिंक्स या फर्जी नंबर्स इंसर्ट कर देते थे, जो यूजर्स को फेक वेबसाइट्स पर ले जाकर बैंक डिटेल्स चुरा लेते थे। TRAI के चेयरमैन पीडी यादव ने कहा, “यह डायरेक्टिव डिजिटल मैसेजिंग चैनल्स में ट्रस्ट बहाल करेगी। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और सरकारी कम्युनिकेशन जैसे जरूरी मैसेजेस अब सुरक्षित होंगे।” अनुमान है कि इससे UCC शिकायतें 30-40% तक कम हो सकती हैं, जैसा कि पिछले साल के डेटा से संकेत मिलता है।
नए नियम कैसे काम करेंगे?
यह सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटेड और ट्रेसेबल होगा। यहां स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया है:
टेम्प्लेट रजिस्ट्रेशन पर टैगिंग: प्रिंसिपल एंटिटी (PEs) – जैसे बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स – को एसएमएस टेम्प्लेट रजिस्टर करते वक्त हर वेरिएबल फील्ड को स्पष्ट लेबल देना होगा। उदाहरण के लिए, अगर कोई लिंक है तो #url# टैग, नंबर के लिए #number#। इससे ऑपरेटर्स को पता चल जाएगा कि यह फील्ड किस उद्देश्य का है।
वैलिडेशन और स्क्रबिंग: टेलीकॉम ऑपरेटर्स (जैसे Jio, Airtel, Vodafone) मैसेज भेजने से पहले इन टैग्ड फील्ड्स को चेक करेंगे। लिंक्स को व्हाइटलिस्टेड डोमेन्स के खिलाफ वेरिफाई किया जाएगा, जबकि नंबर्स में कोई स्पेशल कैरेक्टर्स (जैसे अल्फान्यूमेरिक) नहीं होने चाहिए। अगर वैलिडेशन फेल होता है, तो मैसेज ब्लॉक हो जाएगा।
ट्रांजिशन पीरियड: अगले 60 दिनों तक (जनवरी 2025 तक) गलतियों पर मैसेज डिलीवर होते रहेंगे, लेकिन ऑपरेटर्स बैकग्राउंड में एरर्स रिकॉर्ड करेंगे। इसके बाद नॉन-कंप्लायंट टेम्प्लेट्स से भेजे मैसेज रिजेक्ट हो जाएंगे। PEs को बार-बार चेतावनी दी जाएगी, और लगातार उल्लंघन पर ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान है।
मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग: ऑपरेटर्स को मंथली रिपोर्ट्स TRAI को सबमिट करनी होंगी, जिसमें फ्रॉड अटेम्प्ट्स और ब्लॉक मैसेजेस की डिटेल्स होंगी। यूजर्स के लिए 1600-सीरीज हेल्पलाइन को मजबूत किया जाएगा, जहां स्पैम रिपोर्टिंग आसान होगी।
आम यूजर्स और बिजनेस को क्या फायदा?
सुरक्षा बढ़ेगी: अब OTP या बैंकिंग अलर्ट जैसे संवेदनशील मैसेजेस में छिपे फ्रॉड लिंक्स पकड़े जाएंगे। NCRB के अनुसार, 2024 में SMS फिशिंग से 1.5 लाख करोड़ का नुकसान हुआ था – यह नियम इसे रोकने में मददगार साबित होगा।
ट्रस्ट रिस्टोर: बिजनेस के लिए प्रमोशनल मैसेजेस अब ज्यादा विश्वसनीय लगेंगे, जिससे कन्वर्जन रेट बढ़ेगा।
छोटे व्यवसायों पर बोझ कम: सिम्पल टैगिंग से कंप्लायंस आसान होगा, हालांकि बड़े बैंक पहले ही अपडेट कर रहे हैं।
ग्लोबल स्टैंडर्ड: यह नियम TCCCPR 2018 को मजबूत करता है और अंतरराष्ट्रीय फ्रॉड प्रिवेंशन मॉडल्स से प्रेरित है।
दिल्ली की रहने वाली 45 वर्षीय होममेकर रीता शर्मा बताती हैं, “पहले हर लिंक पर क्लिक करने से डर लगता था। अब TRAI का यह कदम से मन को सुकून मिला है।” देश में 120 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स हैं, जिनमें से 70% कमर्शियल मैसेजेस रिसीव करते हैं। TRAI ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल कमर्शियल एसएमएस पर लागू होगा, पर्सनल मैसेजेस अप्रभावित रहेंगे।
कुल मिलाकर, यह डायरेक्टिव डिजिटल इंडिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अगर आप स्पैम का शिकार हो रहे हैं, तो तुरंत 1909 पर कॉल करें। TRAI का यह प्रयास फ्रॉडस्टर्स को साफ संदेश देता है – अब चोरी का रास्ता बंद हो चुका है!
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