UGC ने हाल ही में नए लर्निंग आउटकम‑बेस्ड करिकुलम फ्रेमवर्क (LOCF) का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें कई विषयों में भारतीय ज्ञान परंपरा को शामिल किया गया है। हालांकि, इस कदम को शिक्षा जगत में सैफ्रोनाइजेशन (भक्तिवादी हिंदुत्ववादी एजेंडा की राजनीति) का प्रवाह के रूप में गंभीरता से देखा जा रहा है—और इसपर तीव्र आलोचना हो रही है। आइए समझते हैं कि क्या पढ़ने को मिल रहा है और क्यों बहस बिगड़ी है।
किस विषय में क्या हुआ शामिल?
गणित: ‘काला गणना’ (काल गणना), सूत्रीय बीजगणित (Sutra-based algebra), शुल्ब सूत्रों से ज्यामिति, सूर्य सिद्धांत, आर्यभटीयम, युग और कल्प जैसे समय-विज्ञान के विषय शामिल किए गए हैं ।
रसायन विज्ञान: इसमें सरस्वती वंदना, आयुर्वेद/सिद्ध/होम्योपैथी में मिश्रण वैज्ञानिक अवधारणाएं, पारंपरिक भारतीय पेय पदार्थ, आदि शामिल हैं।
इतिहास: वी. डी. सावकर की पुस्तक “The Indian War of Independence” को स्वतंत्रता आंदोलन पर पढ़ाने के लिए सुझाया गया है।
कॉमर्स: कौटिल्य का अर्थशास्त्र, ‘राम राज्य’ को कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ना, भारतीय ज्ञान दर्शन जैसी अवधारणाएं शामिल हैं।
आलोचना क्या कह रही है?
शैक्षणिक समुदाय और छात्रों का आरोप है कि इस बदलाव से वैज्ञानिक चेतना और तार्किक सोच कमजोर हो रही है। आलोचकों ने इसे “पश्चगामी”, पौराणिक और मिथकात्मक शिक्षा प्रचारित करने की कोशिश बताया है।
Students’ Federation of India (SFI) ने दृढ़ता से विरोध जताया—उन्होंने कहा कि यह संविधान में निहित वैज्ञानिक चेतना बनाए रखने का दायित्व (Article 51A(h)) की अनदेखी है।
प्रोफेसर एंबर हबीब (शिव नादर यूनिवर्सिटी) ने गणित पाठ्यक्रम पर चिंता जताई—यदि केवल प्राचीन गणित पढ़ाई गई तो छात्र आधुनिक गणितीय शोध और उच्च शिक्षा में पिछड़ सकते हैं।
UGC का पक्ष क्या है?
UGC का कहना है कि ये बदलाव शिक्षा को केवल पुस्तकज्ञान से आगे बढ़ा कर व्यावहारिक और भारतीय दृष्टिकोण आधारित बनाना चाहते हैं। उनका उद्देश्य छात्रों में 21वीं सदी की आलोचनात्मक सोच, समस्या समाधान क्षमता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और आत्मनिर्देशित सीखने की क्षमता विकसित करना है।
संवैधानिक और प्रशासनिक चुनौतियां:
इस प्रकार की धर्मकेंद्रित शिक्षा Article 28 (राज्य नियंत्रित संस्थानों में धार्मिक शिक्षा की निषेध) का उल्लंघन कर सकती है।
“सैफ्रोनाइजेशन” जैसे कदम धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत को कमजोर करते हैं, जो कि संविधान की मूल संरचना में शामिल है।
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