तेजस Mk‑2 की पहली उड़ान तय: जून 2026 में आसमान छूएगा भारत का अगला‑पीढ़ी फाइटर

भारत के स्वदेशी फाइटर जेट कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण प्रगति सामने आई है, क्योंकि तेजस Mk‑2 (Light Combat Aircraft Mk‑2) की पहली उड़ान (Maiden Flight) के लिये जून 2026 को लक्ष्य बनाया गया है। यह जानकारी डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने हाल ही में दी, जिससे भारतीय वायु सेना की शक्ति और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मजबूती मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

DRDO के TEJAS‑25 राष्ट्रीय सेमिनार में दिए गए अपडेट के अनुसार, तेजस Mk‑2 परियोजना विकास के मुख्य चरणों पर तेजी से आगे बढ़ रही है और पहली उड़ान जून 2026 तक पूरा हो सकती है। इस कार्यक्रम में DRDO अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि तेजस Mk‑2 और Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA) दोनों ही समय‑बद्ध तरीके से प्रगति कर रहे हैं।

तेजस Mk‑2, भारतीय वायु सेना के मौजूदा तेजस Mk‑1 श्रृंखला का उन्नत और शक्तिशाली संस्करण है। Mk‑2 में कई तकनीकी सुधार किए गए हैं, जिनमें बेहतर एवियोनिक्स, उन्नत हथियार प्रणाली, लम्बी दूरी और भार वाहक क्षमता में वृद्धि जैसे फीचर्स शामिल हैं। यह फाइटर जेट भारत की रक्षा क्षमताओं में बड़ा इजाफा करेगा और विघटित पुराने विमानों जैसे Mirage‑2000, MiG‑29 व Jaguar की जगह लेने में सक्षम होगा।

प्रोटोटाइप की असेंबली तेजी से चल रही है और निर्माण कार्य में विंग, फ्यूसलेज, एवियोनिक्स तथा इंजन सिस्टम को मिलाकर विमान को उड़ान के लिये तैयार किया जा रहा है। HAL और ADA (Aeronautical Development Agency) मिलकर Mk‑2 के डिजाइन तथा टेस्टिंग पर काम कर रहे हैं, ताकि परियोजना निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्य तक पहुंच सके।

वर्तमान योजना के अनुसार 2025 के अंत तक Mk‑2 का पहला प्रोटोटाइप तैयार होने की उम्मीद थी और उसके बाद जनवरी से मार्च 2026 तक ग्राउंड ट्रायल व टेस्ट रन तथा इंजन चेक स्थापित होंगे। इसके बाद ही जून 2026 में पहली उड़ान संभव होगी, जिसका लक्ष्य DRDO द्वारा साझा किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार तेजस Mk‑2 में भारत की पहली ट्रिपल‑कंप्यूटर आर्किटेक्चर जैसी उन्नत तकनीक शामिल होगी, जिससे उड़ान नियंत्रण, मिशन मैनेजमेंट तथा डेटा प्रोसेसिंग मजबूत और सुरक्षित होगी। यह तकनीक सामान्य दो कंप्यूटर के मुकाबले अधिक विश्वसनीयता और कार्यकुशलता प्रदान करेगी और लड़ाकू समरांगण में Mk‑2 को श्रेष्ठ बनायेगी।

DRDO के इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर वायु सेना की क्षमता को बढ़ाने के लिये तेजस Mk‑2 का रोल अत्यंत महत्वपूर्ण है। Mk‑2 को भारतीय वायु सेना के लिए एक 4.5‑जेनरेशन मल्टी‑रोल एयरक्राफ्ट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिसमें आधुनिक हथियार प्रणालियाँ, AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम व इंटीग्रेटेड एवियोनिक्स सिस्टम शामिल हैं।

वायु सेना के मुख्य कार्याें में से एक यह है कि तेजस Mk‑2 के उड़ान परीक्षण, हथियार परीक्षण और ऑपरेशनल सर्टिफिकेशन को यथाशीघ्र पूरा किया जाये, जिससे इसे जल्द ही अपरेटिंग स्क्वाड्रन्स में शामिल किया जा सके। अगले कुछ वर्षों में Mk‑2 की बड़े पैमाने पर निर्माण तथा वायु सेना में सेवा में शामिल होने की उम्मीद है, जो भारतीय सैन्य वायु शक्ति को और भी अधिक मजबूती देगा।

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