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सरकारी स्कूल और अस्पतालों की दुर्दशा: जब लोककल्याण की जगह ले लेता है मुनाफा, तो सवाल उठता है— जिम्मेदार कौन

एक समय था जब सरकारी स्कूल और अस्पताल देश की रीढ़ माने जाते थे। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सेवाएं आमजन तक पहुंचाने का यह सबसे सशक्त माध्यम थे। लेकिन आज, वही संस्थान अपनी विश्वसनीयता, गुणवत्ता और उद्देश्य को खोते नजर आ रहे हैं। नतीजा यह है कि जनता का भरोसा सरकारी सिस्टम से हटकर प्राइवेट संस्थानों की ओर चला …

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