भारतीय शादियाँ *शगुन* लिफाफे, *जूता छुपाई* भुगतान और सजावटी नोटों की माला जैसी परंपराओं पर आधारित होती हैं—जो ₹10 और ₹20 के नोटों के बंडलों को अपरिहार्य बनाती हैं। अक्टूबर-फरवरी में शादियों का मौसम चरम पर होता है, जिससे माँग आसमान छू जाती है, जिससे अक्सर बैंकों के स्टॉक कम हो जाते हैं। यह व्यावहारिक मार्गदर्शिका आपको अक्टूबर 2025 तक …
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