Tag Archives: Irrfan Khan’s last letter: The story of staying alive even in pain

इरफान खान की आखिरी चिट्ठी: दर्द में भी जिंदा रहने की दास्तान

हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म ‘आनंद’ में राजेश खन्ना का एक संवाद आज भी हमारे दिलों में बसा हुआ है — “ज़िंदगी बड़ी होनी चाहिए बाबू मोशाय, लंबी नहीं…” ‘आनंद’ का यही फलसफा था — जीवन का मूल्य उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि उसकी गहराई और योगदान में है। हमारी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे बिरले कलाकार हुए हैं जिन्होंने इस दर्शन …

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