हाल ही में कुछ विशेषज्ञों ने यह दावा किया कि कुछ प्रकार की सर्जरी से टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित या समाप्त किया जा सकता है। इस खबर ने डायबिटीज के मरीजों और उनके परिवारों में उत्सुकता और सवाल दोनों ही पैदा कर दिए हैं।
क्या है यह सर्जिकल तरीका?
डॉक्टरों के अनुसार, मोटापे और डायबिटीज से पीड़ित मरीजों के लिए बैरियाट्रिक सर्जरी (Bariatric Surgery) या मेटाबोलिक सर्जरी का विकल्प अब प्रचलित हो रहा है। इसमें मुख्य रूप से पेट और छोटी आंत के कुछ हिस्सों में बदलाव किया जाता है, जिससे ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रहता है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है।
कुछ अध्ययन में पाया गया है कि:
मोटापे वाले टाइप 2 डायबिटीज मरीजों में सर्जरी के बाद ब्लड शुगर स्तर काफी हद तक सामान्य हो जाता है।
कुछ मरीजों को दवाइयों की जरूरत पूरी तरह बंद हो जाती है।
वजन कम होने के साथ-साथ दिल, लिवर और गुर्दे पर भी सकारात्मक असर दिखता है।
क्या यह हर मरीज के लिए फायदेमंद है?
डॉक्टरों का कहना है कि यह सर्जरी हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके प्रभाव कई कारकों पर निर्भर करते हैं:
मरीज की उम्र और डायबिटीज की अवधि
मोटापे की गंभीरता
अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का होना
सर्जरी के बाद जीवनशैली में सुधार
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि मरीज सर्जरी के बाद सही डाइट और व्यायाम नहीं अपनाते, तो डायबिटीज वापस आने का खतरा बना रहता है।
सावधानी और जोखिम
जैसा कि हर सर्जरी में जोखिम होते हैं, वैसे ही इस प्रकार की सर्जरी में भी कुछ जटिलताएं हो सकती हैं:
संक्रमण और ब्लीडिंग का खतरा
पोषण संबंधी कमी
एनेस्थीसिया से जुड़ी समस्याएं
डॉक्टरों की सलाह है कि मरीज सर्जरी से पहले पूरी तरह जांच कराएं और विशेषज्ञों से विस्तृत चर्चा करें।
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