बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 1 अगस्त को जारी होने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने चुनाव आयोग को मतदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए दस्तावेज़ों की सूची में आधार और वोटर आईडी कार्ड को भी स्वीकार करने पर विचार करने का सुझाव दिया है।
सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “सिर्फ आधार ही नहीं, 11 में से 11 दस्तावेज भी जाली हो सकते हैं। यह एक अलग मुद्दा है। यदि कोई फर्जी दस्तावेज़ का इस्तेमाल करता है तो आयोग उस पर कानूनी कार्रवाई करे।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि चुनाव आयोग का उद्देश्य व्यापक समावेशन होना चाहिए, ताकि किसी योग्य मतदाता को सूची से बाहर न किया जाए।
इस पर चुनाव आयोग के वकील ने तर्क दिया कि “राशन कार्ड, आधार और वोटर आईडी में कई तरह की गड़बड़ियां हैं। इसलिए आयोग केवल इन्हीं दस्तावेजों को मान्यता नहीं दे सकता।”
सुप्रीम कोर्ट 24 जून को जारी चुनाव आयोग के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की विस्तृत सुनवाई की तारीख बुधवार को तय करने की बात कही है।
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