सुप्रीम कोर्ट ने असम के सिलचर में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण कार्य की गतिविधियों पर रोक लगा दी है. कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के उस आदेश को पलट दिया है, जिसमें भूमि को मंजूरी देने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी गई थी.
अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि पर्यावरण मंजूरी के बिना गतिविधियां की गईं, जो 2006 की पर्यावरणीय प्रभाव आकलन अधिसूचना का उल्लंघन है.
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
पीठ ने कहा, ”हमारा मानना है कि वर्तमान मामले में अधिकारियों ने पर्यावरण मंजूरी के अभाव में साइट पर व्यापक मंजूरी देकर अधिसूचना का उल्लंघन किया है. असम सरकार ने कहा कि एक नागरिक हवाई अड्डा बनाने की जरूरत है. हवाई अड्डे का निर्णय नीति का विषय है, लेकिन जब कानून गतिविधियों को करने के लिए विशिष्ट मानदंडों का निर्धारण करता है तो कानून के प्रावधान का अनुपालन किया जाना चाहिए और अभी तक कोई पर्यावरणीय मंजूरी जारी नहीं की गई है.”
उल्लंघन करने वाली गतिविधि न हों- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2006 की अधिसूचना का उल्लंघन करने वाली कोई भी गतिविधि नहीं होनी चाहिए. अदालत ने याचिका पर विचार न करके अपने कर्तव्य की उपेक्षा करने के लिए एनजीटी की भी आलोचना की. CJI चंद्रचूड़ ने रिपोर्ट आने तक यथास्थिति बनाए रखने का सुझाव दिया. इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को गुमराह किया जा रहा है.
NGT ने खारिज की थी याचिका
इस बीच याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने अपना पक्ष रखा और कहा कि संयुक्त सचिव के हलफनामे में गलत बयान दिये गये हैं. कोर्ट ने निर्देश दिया कि एक बार क्लीयरेंस रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद असम सरकार काम शुरू करने के लिए आवेदन कर सकती है. सीजेआई ने यह भी कहा कि श्रमिकों के घरों का निर्माण ईआईए अधिसूचना का उल्लंघन होगा. बता दें कि लगभग 41 लाख झाड़ियों को हटाने के खिलाफ याचिका को एनजीटी ने 25 मार्च को खारिज कर दिया था.
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