बिहार में बीपीएससी 70वीं सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की मांग को लेकर बवाल लगातार बढ़ता जा रहा है। पटना में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और पेपर लीक का आरोप लगाते हुए कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन में पटना के मशहूर कोचिंग संचालक खान सर और कुछ राजनीतिक दलों का भी समर्थन मिल रहा है। इस बीच, पुलिस द्वारा प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज ने मामले को और तूल दे दिया है। हालांकि, बिहार लोक सेवा आयोग ने यह साफ इनकार किया है कि पेपर लीक हुआ था और आयोग ने यह भी कह दिया है कि परीक्षा रद्द नहीं होगी।
हालांकि, इस बार छात्र सिर्फ पेपर लीक होने का दावा कर रहे हैं और उसी आधार पर परीक्षा दोबारा कराए जाने की मांग कर रहे हैं। मगर, इससे पहले भी बीपीएससी संयुक्त प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा को लेकर बवाल हो चुका है और पेपर लीक की घटना की वजह से परीक्षा रद्द की गई थी। यह घटना साल 2022 में हुई थी। तब बीपीएससी ने 67वीं सिविल सेवा परीक्षा का आयोजन किया था। प्रीलिम्स परीक्षा 8 मई 2022 को होनी थी, लेकिन परीक्षा से पहले ही प्रश्न पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया था, जिसके बाद बीपीएससी ने तीन सदस्यीय जांच टीम का गठन किया। जांच टीम ने महज तीन घंटे में रिपोर्ट सौंप दी।
जांच टीम को क्या मिला था? बीपीएससी की जांच टीम ने सोशल मीडिया पर वायरल हुए प्रश्न पत्र की जांच की और पाया कि वह सही था। इसके बाद आयोग ने परीक्षा को रद्द कर दिया। फिर 30 सितंबर 2022 को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें करीब 4.75 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इस परीक्षा का परिणाम 17 नवंबर 2022 को जारी किया गया और उसके बाद मुख्य परीक्षा का आयोजन 29, 30 और 31 दिसंबर 2022 को हुआ। बीपीएससी ने इस परीक्षा का फाइनल रिजल्ट 28 अक्टूबर 2023 को घोषित किया, जिसमें करीब 800 उम्मीदवारों का चयन हुआ।
पटना के बापू परीक्षा केंद्र पर दोबारा होगी परीक्षा बीपीएससी परीक्षा का आयोजन 13 दिसंबर को राज्यभर के कई केंद्रों पर किया गया था। हालांकि, सभी केंद्रों पर परीक्षा सही ढंग से हुई, लेकिन पटना के बापू परीक्षा केंद्र पर कुछ छात्रों को प्रश्न पत्र नहीं मिला, जिसके बाद बवाल शुरू हो गया। इसके बाद कुछ उम्मीदवारों ने पेपर लीक का आरोप लगाया और कुछ परीक्षा छोड़कर बाहर निकल गए। इस घटना के बाद पटना के डीएम द्वारा एक छात्र को थप्पड़ मारने की घटना भी चर्चा का विषय बनी। इस घटना के बाद छात्रों का आंदोलन और तेज हो गया और अब पूरी परीक्षा रद्द करने की मांग उठने लगी है।
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