चोरी का फोन अब कबाड़! सरकार के नए IMEI नियम से बाजार में हाहाकार

हर स्मार्टफोन के अंदर छिपा 15 अंकों का एक कोड होता है – IMEI (International Mobile Equipment Identity)। इसे फोन का ‘ग्लोबल फिंगरप्रिंट’ कहें तो गलत नहीं होगा। यह नंबर दुनिया में एकदम यूनिक होता है, ठीक वैसे ही जैसे इंसान का आधार नंबर या गाड़ी का चेसिस नंबर। चाहे आप सिम बदल लें, फोन फॉर्मेट कर दें या नया सॉफ्टवेयर डाल दें – IMEI कभी नहीं बदलता। यही वजह है कि चोरी हुए फोन को पुलिस कुछ ही मिनटों में ट्रैक कर लेती है, और यही वजह है कि अब सरकार ने IMEI के दुरुपयोग पर पूरी तरह लगाम कसने का फैसला किया है।
IMEI नंबर क्या है और कहां मिलता है?

15 डिजिट का यह कोड हर डिवाइस को मैन्युफैक्चरिंग के समय ही मिलता है।
डायल करें *#06# → स्क्रीन पर तुरंत IMEI दिख जाएगा।
फोन के बॉक्स, बैटरी के नीचे या Settings → About Phone में भी मिलता है।
डुअल-सिम फोन में दो IMEI होते हैं – एक हर स्लॉट के लिए।

कैसे ट्रैक होता है फोन?
जब भी आपका फोन किसी टावर से कनेक्ट होता है, तो IMEI नंबर ऑटोमैटिकली नेटवर्क को भेजा जाता है। DoT का CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल पूरे देश के IMEI डेटाबेस से कनेक्टेड है। अगर कोई फोन चोरी हो जाए और मालिक CEIR पोर्टल (ceir.gov.in) पर शिकायत दर्ज करे, तो:

उस IMEI को ब्लॉक लिस्ट में डाला जाता है।
पूरे भारत में वह फोन किसी भी सिम से काम नहीं करेगा।
अगर चोर नया सिम डालेगा, तो लोकेशन तुरंत पुलिस को मिल जाएगी।

2024-25 में CEIR की वजह से 19 लाख से ज्यादा चोरी/गुम हुए फोन ब्लॉक किए गए, जिनमें से 3.2 लाख फोन बरामद भी हुए। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु में तो चोरी की बाइक पर मिले फोन तक ट्रेस हो गए।
सरकार ने क्यों कड़े किए नियम?
पहले चोर IMEI चेंजर टूल्स (जैसे MTK Engineering, Chimera Tool) से 5-10 हजार रुपये में नंबर बदल देते थे। इसके बाद फोन को नया बताकर OLX-Quickr पर बेच दिया जाता था। अब सरकार ने तीन बड़े कदम उठाए हैं:

IMEI डुप्लिकेशन पर बैन: एक ही नंबर दो फोन्स में नहीं चल सकता। नया फोन लॉन्च होने से पहले IMEI ग्लोबल डेटाबेस में चेक होगा।
IMEI चेंजर ऐप्स पर रोक: प्ले स्टोर से 50+ ऐसे टूल्स हटा दिए गए। अब इन्हें डाउनलोड करना या इस्तेमाल करना साइबर क्राइम माना जाएगा।
रजिस्ट्रेशन अनिवार्य: दिसंबर 2025 से विदेश से लाए गए फोन को 30 दिन के अंदर IMEI रजिस्टर करना होगा, वरना नेटवर्क बंद हो जाएगा।

DoT के एक सीनियर अधिकारी ने बताया, “चोरी के फोन का सबसे बड़ा बाजार IMEI बदलने पर टिका था। अब वह रास्ता पूरी तरह बंद हो रहा है।” नतीजा – 2025 में चोरी के फोन की ब्लैक मार्केट वैल्यू 70% तक गिरने का अनुमान है।
आम आदमी को क्या करना चाहिए?

फोन खरीदते समय *#06# डायल करके IMEI चेक करें और बॉक्स से मिलान करें।
सेकंड-हैंड फोन लेते समय CEIR पोर्टल पर चेक करें कि वह ब्लॉक तो नहीं।
फोन गुम होने पर तुरंत पुलिस में FIR और CEIR पर रिपोर्ट करें।

आज की तारीख में भारत में 115 करोड़ से ज्यादा एक्टिव मोबाइल कनेक्शन हैं। IMEI की वजह से अब चोरों के लिए फोन चुराना फायदे का सौदा नहीं रहा। सरकार का यह कदम न सिर्फ चोरी रोकने में मदद करेगा, बल्कि देश को डिजिटल क्राइम से सुरक्षित बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

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