Physical Therapy trying to relieve pain, injury shown in x-ray

जोड़ों में अकड़न या सूजन? आर्थराइटिस के ये संकेत न करें नजरअंदाज

बदलती जीवनशैली, बढ़ती उम्र और असंतुलित खानपान के चलते जोड़ों से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। इन बीमारियों में सबसे आम लेकिन गंभीर बीमारी है ‘आर्थराइटिस’ (Arthritis), जो समय रहते न पहचानी जाए तो जीवन की गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में करोड़ों लोग किसी न किसी रूप में आर्थराइटिस से पीड़ित हैं। भारत में भी यह रोग तेजी से बढ़ रहा है, खासकर 40 वर्ष की आयु के बाद। लेकिन चिंता की बात यह है कि अधिकतर लोग इसके प्रारंभिक लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं, जिससे समय रहते इलाज नहीं हो पाता।

क्या है आर्थराइटिस?

आर्थराइटिस एक सूजन आधारित रोग है, जो जोड़ों को प्रभावित करता है। इसके मुख्य रूप से दो प्रकार हैं:

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) – उम्र बढ़ने के साथ होने वाला सामान्य जोड़ों का घिसाव।

रुमेटॉयड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) – एक ऑटोइम्यून स्थिति, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली अपने ही जोड़ों पर हमला करती है।

शुरुआती संकेत जिन्हें न करें नजरअंदाज:
1. सुबह-सुबह जोड़ों में अकड़न

अगर आप रोज सुबह उठने के बाद हाथों, घुटनों या पीठ में 30 मिनट से अधिक की अकड़न महसूस करते हैं, तो यह आर्थराइटिस की शुरुआती चेतावनी हो सकती है।

2. हल्का-हल्का दर्द जो समय के साथ बढ़े

कभी-कभी हल्का दर्द शुरू होता है जो कुछ समय बाद तेज और असहनीय हो जाता है, खासकर चलने या सीढ़ियां चढ़ने में।

3. जोड़ों में सूजन और गर्माहट

किसी विशेष जोड़ (जैसे घुटना या कलाई) पर सूजन, लालिमा या छूने पर गर्म महसूस होना, सूजन की ओर संकेत करता है।

4. चलने-फिरने या उठने-बैठने में कठिनाई

यदि आपको बार-बार उठने या झुकने में परेशानी हो रही है, और जोड़ों में लचकपन महसूस होता है, तो यह गंभीर संकेत हो सकते हैं।

5. थकान और हल्का बुखार

विशेषकर रुमेटॉयड आर्थराइटिस में, रोगी को अक्सर थकावट, कमजोरी और हल्का बुखार रह सकता है, जो एक इम्यून प्रतिक्रिया का परिणाम होता है।

विशेषज्ञों की सलाह:

डॉ. रूमेटोलॉजिस्ट, कहती हैं:

“अगर जोड़ों में बार-बार दर्द, अकड़न या सूजन हो रही है, तो व्यक्ति को इसे ‘सामान्य कमजोरी’ समझने की गलती नहीं करनी चाहिए। शुरुआती जांच से रोग को काबू में रखा जा सकता है।”

समय पर जांच क्यों है जरूरी?

रोग की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाए, तो दर्द को नियंत्रित किया जा सकता है।

फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और दवाइयों के माध्यम से रोग की प्रगति रोकी जा सकती है।

अनदेखी करने पर रोग जोड़ों को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

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