भाप से राहत या नई परेशानी? जानें प्रदूषण में क्या है सही

बढ़ते वायु प्रदूषण ने देशभर में श्वसन संबंधी समस्याओं को नई ऊँचाइयों तक पहुँचा दिया है। धूल, धुआँ और स्मॉग से भरी हवा न केवल आँखों और त्वचा को प्रभावित करती है, बल्कि गले और नाक में जलन पैदा कर सामान्य जुकाम जैसा अनुभव भी कराती है। ऐसे में बहुत से लोग राहत पाने के लिए तुरंत भाप लेने का सहारा लेते हैं। पारंपरिक तौर पर यह तरीका लाभदायक माना जाता रहा है, पर विशेषज्ञों की मानें तो प्रदूषण से होने वाले जुकाम में बार-बार भाप लेना कई बार नुकसान भी पहुँचा सकता है।

प्रदूषण का जुकाम अलग कैसे?

सर्दी या वायरल संक्रमण के दौरान जुकाम के कारण नाक बंद होना और गले में बलगम जमना आम बात है। ऐसे मामलों में भाप लेने से बलगम ढीला होता है और अस्थायी राहत मिलती है। लेकिन प्रदूषण जनित जुकाम में बलगम उतना नहीं बनता जितनी अधिक जलन, सूजन और एलर्जिक प्रतिक्रिया होती है। यानी समस्या का स्रोत संक्रमण नहीं, बल्कि हवा में मौजूद कण और रसायन होते हैं।

भाप कब नुकसानदेह हो सकती है?

विशेषज्ञ बताते हैं कि लगातार भाप लेने से नासिकाओं की भीतर की नमी कम हो सकती है। जब हवा में प्रदूषण पहले से ही अधिक हो, ऐसे में सूखी नाक धूल और रसायनों को और तेजी से अंदर जाने देती है। इससे जलन, छींक और खांसी बढ़ सकती है। कुछ लोगों में यह आदत नाक की संवेदनशील ऊतक-पर्त को भी कमजोर कर देती है। वहीं अत्यधिक गर्म भाप से त्वचा पर जलन, लालिमा और कभी-कभी हल्के जलने के घाव भी देखे गए हैं।

बच्चों और बुजुर्गों के लिए अधिक जोखिम

बच्चों की श्वसन प्रणाली अधिक संवेदनशील होती है। लगातार भाप लेने पर उनकी नाक एवं गले की परत सूखने लगती है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती है। बुजुर्गों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है क्योंकि उनके ऊतक पहले ही कमजोर होते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन्हें भाप लेने की जगह अन्य सुरक्षित उपाय अपनाने चाहिए।

तो क्या पूरी तरह भाप छोड़ दें?

विशेषज्ञ भाप को पूरी तरह गलत नहीं ठहराते। यदि नाक पूरी तरह बंद हो, गाढ़ा बलगम जमा हो या वायरल संक्रमण की आशंका हो, तो दिन में एक बार हल्की, नियंत्रित भाप ले सकते हैं। परंतु इसे आदत बनाना या प्रदूषण के कारण हुई जलन में बार-बार करना नुकसानदेह साबित हो सकता है। इसके लिए सामान्य गर्म पानी की भाप ही पर्याप्त है; अत्यधिक गर्म पानी या मेन्थॉल मिश्रित भाप कई बार उल्टा असर कर सकती है।

बेहतर विकल्प क्या हैं?

प्रदूषण से जुकाम में राहत पाने के लिए नमी बनाए रखना सबसे आवश्यक है। विशेषज्ञ निम्न उपाय सुझाते हैं:

कमरे में ह्यूमिडिफायर का उपयोग

नाक को आराम देने के लिए सेलाइन स्प्रे

दिनभर पर्याप्त पानी पीकर शरीर में हाइड्रेशन बनाए रखना

बाहर निकलते समय एन-95 मास्क पहनना

घर लौटकर चेहरे और नाक के आसपास का क्षेत्र अच्छी तरह धोना

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