टेम्बा बावुमा की अगुवाई में साउथ अफ्रीका ने वो कर दिखाया, जिसका इंतजार फैंस पिछले कई दशकों से कर रहे थे। WTC 2025 के फाइनल में डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 5 विकेट से हराकर साउथ अफ्रीका ने न सिर्फ ट्रॉफी जीती, बल्कि अपने ‘चोकर्स’ टैग को भी इतिहास के पन्नों में दफना दिया।
33 साल बाद टूटी खामोशी, बना नया चैप्टर
लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान में खेले गए इस मुकाबले में साउथ अफ्रीका ने 282 रनों का मुश्किल लक्ष्य महज़ चार दिन में हासिल कर लिया। 1998 की चैंपियंस ट्रॉफी के बाद ये पहली बार है जब टीम ने किसी सीनियर ICC टूर्नामेंट में खिताब जीता है।
रबाडा-मार्करम बने हीरो, बावुमा ने दिल जीता
इस ऐतिहासिक जीत के हीरो रहे कगिसो रबाडा, जिन्होंने मैच में कुल 9 विकेट झटके, और एडन मार्करम, जिन्होंने चौथी पारी में दबाव के बीच शानदार 136 रनों की मैच विनिंग पारी खेली। वहीं, कप्तान टेम्बा बावुमा ने हैमस्ट्रिंग इंजरी के बावजूद 66 रन बनाकर टीम की कमान थामे रखी।
लॉर्ड्स में गूंजा अफ्रीका का जीत का नगाड़ा
मैच के चौथे दिन जैसे ही काइल वेरेयना ने विजयी रन बनाया, ड्रेसिंग रूम से लेकर पूरे स्टेडियम में जश्न का तूफान आ गया। 27 साल के लंबे सूखे को तोड़ते हुए, साउथ अफ्रीका आखिरकार क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित फॉर्मेट में चैंपियन बना।
‘अगर-मगर’ को किया दरकिनार, लिखी जीत की नई स्क्रिप्ट
इतिहास की बात करें तो 282 रनों का पीछा चौथी पारी में करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। लॉर्ड्स में इससे पहले केवल 4 बार ऐसा हुआ था कि कोई टीम 200 से ज्यादा रन सफलतापूर्वक चेज़ कर पाई हो। इसके बावजूद, बावुमा और मार्करम की 147 रन की साझेदारी ने हर आशंका को खारिज कर दिया।
मार्करम की पारी ने तय किया ट्रॉफी का रास्ता
हालांकि चौथे दिन बावुमा सिर्फ 1 रन और जोड़कर आउट हो गए, लेकिन तब तक दोनों ने साउथ अफ्रीका को मजबूत स्थिति में पहुंचा दिया था।
मार्करम आखिरी समय तक टिके रहे और जब वो 136 रन बनाकर आउट हुए, टीम जीत से सिर्फ 7 रन दूर थी। यानी मिशन पूरा हो चुका था।
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