सोनम-राजा हत्याकांड जैसा ही था 2003 का बेंगलुरु मर्डर केस — प्यार, धोखा और मौत का दोहराया गया स्क्रिप्ट

प्यार था, वादे थे और भरोसा भी… लेकिन सच्चाई जानकर रूह कांप जाती है।

21 साल पहले की एक प्रेम कहानी आज फिर चर्चा में है, क्योंकि इंदौर हनीमून हत्याकांड से मिलती-जुलती यह कहानी आज के समाज को एक बार फिर आगाह कर रही है कि प्यार के नाम पर भी किस हद तक जाया जा सकता है।

📍 घटना की शुरुआत — जब सबकुछ सही लग रहा था
30 नवंबर 2003, कर्नाटक का बेंगलुरु शहर।
गिरीश, एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर।
शुभा शंकरनारायण, लॉ की स्टूडेंट।

दोनों की सगाई तय हुई। परिवार 10 सालों से एक-दूसरे को जानता था। गिरीश ने शुभा के साथ नई ज़िंदगी के सपने देखना शुरू कर दिए। शादी की तारीख भी तय हो गई — अप्रैल 2004।

❤️‍🔥 पर परदे के पीछे थी एक और कहानी…
जैसे इंदौर केस में सोनम का अफेयर राज कुशवाहा से था, ठीक वैसे ही शुभा अपने कॉलेज के जूनियर अरुण वर्मा से इश्क़ करती थी। शुभा ने जब अपने माता-पिता को अरुण के बारे में बताया, तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया।

नतीजा? परिवार ने जबरदस्ती गिरीश से उसकी सगाई कर दी। लेकिन शुभा झुकी नहीं — उसने अपने प्रेमी अरुण के साथ मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रच डाली।

🍽️ डिनर का न्योता बना मौत का बहाना
3 दिसंबर 2003, शुभा ने गिरीश को डिनर पर चलने के लिए कहा। फिर वह उसे एचएएल हवाई अड्डे के पास एक सुनसान जगह पर ले गई। कहा – “मुझे उड़ता हुआ जहाज देखना है।”
गिरीश अभी आसमान की ओर देखने ही वाला था कि पीछे से सिर पर वार किया गया। वह वहीं गिर पड़ा। शुभा ने दिखावे के लिए उसे हॉस्पिटल पहुंचाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

🕵️‍♀️ सुराग मिला सगाई के वीडियो और कॉल रिकॉर्ड से
शुभा ने पुलिस को झूठी कहानी सुनाई – दो अजनबियों ने हमला किया। लेकिन जब सगाई का वीडियो देखा गया, तो शुभा के चेहरे पर कोई खुशी नहीं दिखी। फिर फोन रिकॉर्ड खंगाले गए। एक नंबर बार-बार कॉल लिस्ट में आ रहा था – अरुण वर्मा।

फोन की लोकेशन ने सब उजागर कर दिया। अरुण ने झूठ बोला था कि वह शहर में नहीं था, लेकिन उसकी मोबाइल लोकेशन ने साबित कर दिया कि वह घटनास्थल पर ही था।

⚖️ जुर्म कबूल, मिली उम्रकैद
पुलिस ने शुभा और अरुण, दोनों से सख्ती से पूछताछ की। वे टूट गए और गुनाह कबूल कर लिया। दो और लोग इस साजिश में शामिल थे — वेंकटेश और दिनकर।
चारों को उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।

🔁 21 साल बाद वही स्क्रिप्ट दोहराई गई?
इंदौर के राजा रघुवंशी हत्याकांड में भी वही पैटर्न — प्यार, धोखा, प्लानिंग और एक निर्दोष की हत्या। फर्क बस इतना कि इस बार नाम सोनम और राजा हैं।

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