सर्दियों के मौसम में निमोनिया एक आम लेकिन गंभीर बीमारी बन जाती है, जिसमें फेफड़ों में सूजन हो जाती है। इस दौरान मरीज की देखभाल बेहद आवश्यक होती है। मगर निमोनिया के दौरान नहाने को लेकर कई तरह की धारणाएं और भ्रम आम हैं। कई लोग सोचते हैं कि निमोनिया में नहाना नुकसान पहुंचा सकता है, तो कुछ लोग इसे जरूरी समझते हैं। आज हम इस विषय पर विशेषज्ञों की सलाह के साथ सही जानकारी प्रस्तुत कर रहे हैं।
निमोनिया में नहाना: मिथक या तथ्य?
निमोनिया में शरीर कमजोर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। इसलिए मरीज को पूरी देखभाल की जरूरत होती है। नहाने को लेकर यह गलतफहमी है कि ठंडे पानी से नहाने से बीमारी बढ़ सकती है या ठीक होने में देर लग सकती है। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि नहाने का तरीका और पानी का तापमान ही मायने रखता है।
कैसे नहाना चाहिए?
डॉक्टरों का कहना है कि निमोनिया में मरीज को गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए, न कि ठंडे या बहुत गर्म पानी से। गुनगुना पानी शरीर को आराम देता है और त्वचा की सफाई भी करता है, जिससे संक्रमण का खतरा कम होता है। साथ ही, नहाने के बाद तुरंत कपड़े पहन लें और ठंडे हवा में न रहें। यह सावधानी शरीर को ठंडा होने से बचाती है।
नहाने में किन बातों का रखें ध्यान?
नहाने का समय ज्यादा लंबा न करें।
तौलिया साफ और सूखा हो।
नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
नहाते समय मसाज या रगड़ से बचें ताकि शरीर को तनाव न हो।
ठंडी जगह पर न रहें और गर्म कपड़े पहनें।
किसे नहाने से बचना चाहिए?
बहुत ज्यादा कमजोरी या बुखार हो तो नहाने से बचें। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को डॉक्टर की सलाह के बिना नहाना ठीक नहीं होता। ऐसे मरीजों को नहाने के बजाय गुनगुने पानी से स्पंज बाथ करवाना बेहतर रहता है।
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