High Security Zone में सेल्फी‑वीडियो बैन; न्याय व्यवस्था ने खींची नई रेखाएँ

सुप्रीम कोर्ट ने अपने मुख्य परिसर को हाई‑सिक्योरिटी जोन घोषित करते हुए वहां फोटोग्राफी, वीडियो शूटिंग, सोशल मीडिया रील और पत्रकारिता इंटरव्यू पर पाबंदी लगा दी है। इस आदेश के पीछे बड़ी वजह यह है कि अधिवक्ताओं की ओर से कोर्ट परिसर के अंदर सामाजिक मीडिया सामग्री तैयार करने की बढ़ती प्रवृत्ति ने अदालत की गरिमा, माहौल और सुरक्षा पर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अदालत ने 10 सितंबर की एक सर्कुलर जारी कर यह निर्देश दिया।

इसके पूर्व सुप्रीम कोर्ट Advocates‑on‑Record Association (SCAORA) ने CJI (Chief Justice of India) को ज्ञापन भेजा था जिसमें उन्होंने यह मांग की कि कोर्ट परिसर, विशेषकर हाई‑सिक्योरिटी ज़ोन में सोशल मीडिया रील, वीडियो प्रमोशन और फोटोग्राफी को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।

नीचे वे छह मुख्य मांगें हैं जिन्हें बार काउंसिल / SCAORA ने न्यायालय से रखी थीं:

6 प्रमुख मांगें

पूर्ण बैन (Complete Prohibition)
सुप्रीम कोर्ट परिसर में, विशेषकर हाई‑सिक्योरिटी ज़ोन में, बिना नियमित अथवा आधिकारिक अनुमति के किसी भी प्रकार की वीडियो/फोटोग्राफी या सोशल मीडिया सामग्री निर्माण पूरी तरह से बंद हो।

सेल्फ‐प्रमोशन एवं अप्रत्यक्ष विज्ञापन की रोक
अधिवक्ताओं द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपने संपर्क विवरण देना, सेवाएं प्रदर्शित करना, या ऐसे कंटेंट तैयार करना जो अप्रत्यक्ष रूप से ग्राहकों को आकर्षित करे, उसे बैन किया जाना चाहिए। ऐसा “impermissible solicitation” बार काउंसिल के नियमों के विरुद्ध है।

कोर्ट प्रॉसीडिंग्स वीडियो/लाइव स्ट्रीम क्लिप्स का दुरुपयोग
जो वीडियो क्लिप्स न्यायालय की सुनवाई या लाइव स्ट्रीम से काट‑छाँट कर सोशल मीडिया पर जारी होते हैं, वे मामला बाहर के संदर्भ में गलत ढंग से पेश किए जा सकते हैं। ऐसे प्रयोग को रोकने की व्यवस्था हो।

अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action)
नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिवक्ताओं, लॉ क्लर्क, इन्टर्न आदि के खिलाफ पारदर्शी और प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित हो। उनके खिलाफ बार एसोसिएशन या राज्य बार काउंसिल द्वारा दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई हो।

मीडिया एवं अन्य स्टेकहोल्डर्स की जिम्मेदारी
मीडिया कर्मियों को भी इन नियमों का पालन करना होगा। यदि कोई पत्रकार या मीडिया हाउस इस प्रतिबंध का उल्लंघन करता है, तो उनके लिए कोर्ट परिसर में प्रवेश प्रतिबंधों के माध्यम से नियंत्रण हो सकता है।

जानकारी और चेतावनी (Awareness & Signage)
कोर्ट परिसर में स्पष्ट सूचना बोर्ड (signage) लगाई जाएँ, अधिवक्ताओं और अन्य से यह नियम लेखित रूप में साझा हो, तथा उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों में कार्यवाहियों की सीमाएँ पहले से सूचित हो।

वर्तमान स्थिति और प्रभाव

सुप्रीम कोर्ट द्वारा 10 सितंबर की सर्कुलर में यह पाबंदी लागू कर दी गई है, जिसमें हाई‑सिक्योरिटी ज़ोन में मोबाइल फोन, कैमरा, ट्राइपोड़, सेल्फी‑स्टिक आदि उपकरणों द्वारा फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी को प्रतिबंधित किया गया है, सिवाय आधिकारिक जरूरतों के।

मीडिया कर्मियों से कहा गया है कि समाचार साक्षात्कार और ब्रॉडकास्टिंग काम कोर्ट के नीचले सुरक्षा क्षेत्र (Low Security Zone) में निर्धारित लॉन (lawn) में ही किया जा सकता है।

लगातार उल्लंघन करने वालों के प्रवेश को निष्कासित करने की संभावना एवं कोर्ट और बार एसोसिएशनों द्वारा कार्रवाई की चेतावनी जारी की गई है।

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