बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखें नजदीक आते ही राज्य में सीट बंटवारे को लेकर सियासी माहौल गरमाता जा रहा है। खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और जनता दल (यू) की अगुवाई वाले महागठबंधन के साथ-साथ NDA के अंदर सीटों के लिए कड़ी टक्कर जारी है। इस बीच, दो पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ नेता शरद यादव और सहनी की भूमिका ने राजनीतिक सस्पेंस और टेंशन को और बढ़ा दिया है।
मांझी-सहनी की बढ़ती भूमिका
विभाजन की गुत्थी में अब जनता दल (एस) के प्रमुख पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और लोक जनशक्ति पार्टी के सह नेता का नाम सामने आ रहा है। माना जा रहा है कि दोनों नेताओं की अलग-अलग मांगें और दबाव ने न केवल NDA में खींचतान बढ़ाई है, बल्कि महागठबंधन के भी भीतर मतभेद को हवा दी है।
मांझी ने अपनी पार्टी के लिए अधिक सीटें मांगना जारी रखा है, जिससे गठबंधन के अंदर समीकरण बिगड़ रहे हैं। वहीं, सहनी भी महागठबंधन की रणनीति को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जिससे गठबंधन के भीतर आपसी तालमेल पर असर पड़ा है।
NDA-महागठबंधन में सीटों को लेकर टकराव
NDA के भीतर भाजपा और जदयू के बीच भी सीटों के बंटवारे को लेकर खींचतान का माहौल है। जबकि महागठबंधन में RJD और कांग्रेस के अलावा अन्य छोटे दल भी सीट बंटवारे को लेकर असंतुष्ट हैं। इससे साफ है कि बिहार में सीट बंटवारे को लेकर दोनों प्रमुख गठबंधनों के लिए यह चुनौती बड़ी राजनीतिक जंग की शुरुआत है।
नेताओं के बयान और आगामी रणनीति
शरद यादव ने हाल ही में कहा है,
“राजनीति में सहमति और समझौता जरूरी है, लेकिन कुछ दल अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जो गठबंधन को कमजोर कर सकता है।”
वहीं, जदयू के वरिष्ठ नेता का कहना है कि सीटों के बंटवारे को लेकर सभी पक्षों के साथ संवाद जारी है और जल्द ही सभी मसलों को सुलझा लिया जाएगा।
चुनावी स्थिति पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि सीट बंटवारे को लेकर जारी यह खींचतान चुनावी रणनीतियों और गठबंधन की मजबूती पर गहरा असर डाल सकती है। बिहार की राजनीति में गठबंधन की एकता और सीटों का सही बंटवारा ही चुनाव के नतीजों को तय करेगा।
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