कान में जमा मैल यानी ईयरवैक्स शरीर की प्राकृतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जो कान को कीटाणुओं, धूल और संक्रमण से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य मात्रा में मैल फायदेमंद होता है, लेकिन जब यह अधिक जमा हो जाए, तो सुनने में परेशानी, खुजली, भारीपन या बंद होने जैसा एहसास हो सकता है। ऐसे में कई लोग तुरंत कान साफ करने की कोशिश करते हैं, परंतु गलत तरीकों का इस्तेमाल अक्सर कान को नुकसान पहुंचा देता है। चिकित्सक सलाह देते हैं कि कान की सफाई हमेशा सुरक्षित और सरल प्राकृतिक उपायों से ही की जानी चाहिए।
कान के मैल को समझना जरूरी
ईयरवैक्स कान की ग्रंथियों द्वारा निर्मित एक प्राकृतिक पदार्थ है, जो धीरे-धीरे खुद ही बाहर की ओर आता रहता है। कई बार धूल, अत्यधिक पसीना या कान में बार-बार उंगली डालने की आदत से मैल कठोर होकर जमा हो जाता है। यह तभी समस्या बनता है जब इसकी मात्रा सामान्य सीमा से अधिक हो जाए।
गुनगुना पानी—सबसे सरल और सुरक्षित तरीका
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि कान के मैल को नरम करने के लिए हल्का गुनगुना पानी सबसे सुरक्षित विकल्पों में एक माना जाता है। नहाते समय कान के बाहरी हिस्से को हल्के गर्म पानी से धोने पर जमा मैल धीरे-धीरे ढीला होकर खुद बाहर आ सकता है। हालांकि ध्यान रखना आवश्यक है कि पानी सीधे कान के अंदर दबाव से न जाए। इस प्रक्रिया को नियमित रूप से अपनाने से कानों में मैल जमा होने की समस्या कम हो सकती है।
नारियल तेल या मिनरल ऑयल का सुरक्षित उपयोग
कान के मैल को नरम करने के लिए हल्के गर्म नारियल तेल या मिनरल ऑयल की कुछ बूंदें भी उपयोगी मानी जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, तेल का तापमान शरीर के तापमान के बराबर होना चाहिए, ताकि कान पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। तेल के संपर्क में आने से जमा मैल धीरे-धीरे मुलायम होता है और कुछ दिनों में स्वतः बाहर आने लगता है।
हालांकि किसी भी प्रकार के तेल का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना उन लोगों को नहीं करना चाहिए जिन्हें कान में दर्द, संक्रमण, छेद या लगातार पानी आने की शिकायत हो।
स्टीम थेरेपी देती है आराम
जैसे सर्दी-जुकाम में भाप देने से राहत मिलती है, वैसे ही स्टीम कान में जमा मैल को ढीला करने में मददगार साबित हो सकती है। गर्म भाप के संपर्क में आने से मैल थोड़ा नरम पड़ जाता है, जिससे उसे बाहर आने में आसानी होती है। यह उपाय पूरी तरह प्राकृतिक और बिना किसी जोखिम के माना जाता है, बशर्ते भाप सीधे कान पर न लगाई जाए।
कॉटन बड से बचें—विशेषज्ञों की सख्त चेतावनी
कान साफ करने के लिए कॉटन बड का उपयोग आम है, लेकिन डॉक्टर इस आदत को खतरनाक बताते हैं। कॉटन बड मैल को अंदर की ओर धकेल देता है, जिससे ब्लॉकेज या चोट की संभावना बढ़ जाती है। कई मामलों में यह कान के पर्दे को भी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कान के अंदर गहराई तक कोई भी वस्तु नहीं डालनी चाहिए।
कब लें डॉक्टर की मदद?
यदि कान में लगातार भारीपन, सुनने में कमी, तेज दर्द, चक्कर या कान से पानी आने जैसी समस्या हो, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय ईएनटी विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर होता है। कई बार मैल इतना कठोर हो जाता है कि सुरक्षित तरीके से केवल डॉक्टर ही उसे निकाल सकते हैं।
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