इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हालिया हमले ने खाड़ी क्षेत्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। इस ऑपरेशन को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने नाम दिया “राइजिंग लॉयन”—और यह महज एक सैन्य हमला नहीं, बल्कि महीनों की गोपनीय रणनीति और हाई-टेक इंटेलिजेंस मिशन का नतीजा था।
इस हमले की सबसे अहम कड़ी थी इज़राइल की खुफिया एजेंसी मोसाद, जिसे दुनिया की सबसे सटीक, घातक और रहस्यमयी एजेंसियों में गिना जाता है।
🔍 मोसाद की प्लानिंग: ज़मीन से आसमान तक घेरा
‘राइजिंग लॉयन’ में मोसाद ने वही किया जिसके लिए वह मशहूर है — चुपचाप घुसपैठ, दुश्मन की कमजोरी का विश्लेषण, और समय आने पर सटीक हमला।
खुफिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोसाद ने ईरान के भीतर पहले से हथियार, ड्रोन और मोबाइल स्ट्राइक सिस्टम्स भेज रखे थे। ये सब कुछ इस तरह किया गया कि ईरान की सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी।
🚁 तस्करी के ज़रिए ईरान में हथियार और ड्रोन की घुसपैठ
हमले से पहले विस्फोटक ड्रोन और हथियारों को तस्करी के माध्यम से ईरान के अंदर सीक्रेट बेस तक पहुंचाया गया। इन्हीं ड्रोन की मदद से तेहरान के पास एक संवेदनशील सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया, जहां मिसाइल लॉन्चर्स तैनात थे।
यह हमला इतना सटीक था कि ईरानी एयर डिफेंस सिस्टम उन्हें रोक ही नहीं पाया।
🎯 ईरानी मिसाइल बेस और सुरक्षा तंत्र पर सीधा वार
मोसाद ने सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली के पास भी गोपनीय हथियार पहुंचा दिए थे, जिससे उन्हें निष्क्रिय किया जा सके। हमले के दौरान इन हथियारों को रिमोटली सक्रिय किया गया और ईरान की जवाबी कार्रवाई की क्षमता को पहले ही ध्वस्त कर दिया गया।
🚛 मोबाइल स्ट्राइक सिस्टम्स से ‘साइलेंट अटैक’
इस ऑपरेशन की खास बात थी ईरान के भीतर ही तैनात किए गए मोबाइल स्ट्राइक सिस्टम्स, जिन्हें समय आने पर सक्रिय कर दिया गया। इससे इज़राइल ने न सिर्फ हमला किया, बल्कि ईरान के पलटवार की संभावना को भी खत्म कर दिया।
📡 महीनों की तैयारी, एक झटके में वार
यह कार्रवाई सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि महीनों की इंटेलिजेंस नेटवर्किंग, सर्विलांस और साइबर निगरानी की परिणति थी। मोसाद के एजेंटों ने अंदर से हर मूवमेंट पर नजर रखी और इज़राइली सेना को हमला करने की परफेक्ट टाइमिंग उपलब्ध कराई।
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