सियालदह कोर्ट ने सोमवार को आरजी कर बलात्कार-हत्या मामले में संजय रॉय को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने दोषी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह फैसला 18 जनवरी को कोर्ट द्वारा संजय रॉय को बलात्कार और हत्या मामले में दोषी पाए जाने के बाद आने वाला है।
आरोपी संजय रॉय से जब उसके आरोपों के बारे में पूछा गया तो उसने दावा किया कि उसने कुछ नहीं किया है और उसे “झूठा फंसाया जा रहा है।”
आरोपी संजय रॉय ने कहा, “मैंने कुछ नहीं किया है, न ही बलात्कार और न ही हत्या। मुझे झूठा फंसाया जा रहा है। आपने सब कुछ देखा है। मैं निर्दोष हूं। मैंने आपको पहले ही बताया था कि मुझे प्रताड़ित किया गया। उन्होंने मुझसे जो चाहा, उस पर हस्ताक्षर करवाए।”
आरोपी के वकील ने तर्क दिया कि भले ही मामला “दुर्लभतम” हो, लेकिन सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “भले ही यह दुर्लभतम मामला हो, लेकिन सुधार की गुंजाइश होनी चाहिए। अदालत को यह दिखाना होगा कि दोषी क्यों सुधार या पुनर्वास के लायक नहीं है… सरकारी वकील को सबूत पेश करने होंगे और कारण बताने होंगे कि व्यक्ति सुधार के लायक क्यों नहीं है और उसे समाज से पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए…”
वकील रहमान ने कहा, “संजय रॉय को मृत्यु तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। दोषी पर बीएनएस की 3 धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने राज्य को पीड़ित परिवार को 17 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया है।”
पीड़िता के माता-पिता ने सियालदह की अदालत के मुआवजे के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “हमें मुआवजा नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए।”
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