शहरी जीवन में वायु प्रदूषण (Air Pollution) से बच पाना मुश्किल होता जा रहा है। धुंध, धूल, वाहन और फैक्ट्री धुएं के कारण फेफड़ों में हानिकारक कण जमा हो जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन प्रदूषित कणों को समय रहते बाहर न निकाला जाए, तो सांस की गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हाल ही में स्वास्थ्य और योग विशेषज्ञों ने एक सरल घरेलू उपाय साझा किया है, जिसे रोज रात 15 मिनट करने से फेफड़ों में जमा धूल और प्रदूषण के कण धीरे-धीरे बाहर निकल सकते हैं।
फेफड़ों में जमा कणों को साफ करने का तरीका
भारी सांस लेने और छोड़ने की तकनीक (Deep Breathing Exercise)
किसी शांत और हवादार जगह पर बैठ जाएँ।
धीरे-धीरे नाक से गहरी सांस लें, फेफड़े पूरी तरह हवा से भरें।
फिर धीरे-धीरे मुँह से हवा छोड़ें।
इसे 10–15 मिनट तक दोहराएं।
हथेली या ताली तकनीक
गहरी सांस लेने के बाद धीरे-धीरे दोनों हाथ फूले हुए फेफड़ों के साथ बाहर की ओर धकेलें।
ऐसा करने से फेफड़ों में फंसी धूल और कण बाहर की ओर खिंचने लगते हैं।
भाप लेना (Steam Inhalation)
गर्म पानी की भाप लेना फेफड़ों की सफाई में मदद करता है।
इसमें 5–10 मिनट का समय देना पर्याप्त है।
चाहें तो इसमें थोड़ा ईucalyptus oil भी डाल सकते हैं, जो श्वसन नली को खोलने में सहायक होता है।
फायदे जो आप महसूस करेंगे
सांस की गुणवत्ता बेहतर होगी: फेफड़ों की सफाई से सांस लेने में आसानी होती है।
सर्दी और खांसी में राहत: जमा कणों के कारण होने वाली हल्की खांसी या गले की खराश कम हो सकती है।
ऊर्जा में वृद्धि: शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलने से दिनभर ऊर्जा बनी रहती है।
लंबी अवधि में फेफड़ों की सुरक्षा: नियमित अभ्यास से फेफड़ों में गंभीर संक्रमण और प्रदूषण से होने वाले नुकसान का खतरा कम होता है।
विशेषज्ञों की सलाह
सुबह और शाम कम से कम 15–20 मिनट तक खुले में टहलना भी फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए लाभकारी है।
धूम्रपान और दूसरी हानिकारक आदतों से बचें।
घर में एयर प्यूरीफायर का उपयोग करें, खासकर प्रदूषण वाले दिनों में।
यदि सांस लेने में गंभीर कठिनाई, तेज खांसी या सीने में दर्द हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
नियमित अभ्यास का महत्व
विशेषज्ञ बताते हैं कि यह अभ्यास रात में सोने से पहले करने से सबसे ज्यादा असर करता है। रोजाना 15 मिनट देने से फेफड़ों में जमा छोटे प्रदूषण कण धीरे-धीरे बाहर निकलते हैं और श्वसन नली साफ रहती है। इससे दिनभर शरीर को अधिक ऑक्सीजन मिलती है और फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है।
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