कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री की ओर से आई एक साधारण बजट की फिल्म ‘कांतारा’ (Kantara) ने देशभर में अपनी धमाकेदार कमाई से न केवल सभी ट्रेड एनालिस्ट्स को चौंका दिया, बल्कि सुपरस्टार रजनीकांत की कई फिल्मों के रिकॉर्ड को भी ध्वस्त कर दिया। यही नहीं, साथ रिलीज़ हुई बड़ी-बजट फिल्मों की तुलना में ‘कांतारा’ ने दर्शकों का जो दिल जीता है, वह अब बॉक्स ऑफिस आंकड़ों में भी खुलकर सामने आ रहा है।
बेहतरीन स्क्रिप्ट और लोककथा से जुड़ी प्रस्तुति बनी कामयाबी की चाबी
‘कांतारा’ की सफलता की सबसे बड़ी वजह इसकी स्थानीय लोककथा पर आधारित कहानी, दर्शनीय सिनेमेटोग्राफी और प्रभावशाली अभिनय मानी जा रही है। फिल्म ने यह साबित कर दिया है कि अगर कहानी दिल को छूने वाली हो और प्रस्तुति ईमानदार, तो बड़े सितारों या भारी-भरकम बजट की ज़रूरत नहीं होती।
निर्देशक और अभिनेता ऋषभ शेट्टी ने फिल्म में नायक की भूमिका के साथ-साथ निर्देशन भी बखूबी निभाया है। उन्होंने एक ऐसी कहानी को पर्दे पर उतारा, जिससे लोग न केवल जुड़ाव महसूस कर सके बल्कि उसमें अपनी संस्कृति और पहचान भी देख सके।
रिकॉर्ड्स की झड़ी: रजनीकांत की फिल्मों से भी आगे
अब तक की रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘कांतारा’ ने तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्मों के पहले सप्ताह की कमाई को भी पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं, यह फिल्म धीरे-धीरे पूरे भारत में ‘पैन इंडिया ब्लॉकबस्टर’ का दर्जा हासिल कर रही है।
जहां रजनीकांत की कुछ फिल्में पहले हफ्ते में ₹100 करोड़ के क्लब में पहुंचने के लिए जूझती नजर आई थीं, वहीं ‘कांतारा’ ने बिना किसी प्रचार या स्टार पावर के उस आंकड़े को पार कर लिया।
SSKTK की तुलना में ‘कांतारा’ की कमाई दुगनी
जहां एक ओर एक और बड़ी फिल्म SSKTK (संभवत: “Some Star-Kid Themed Kitsch” जैसा कोई बड़ा बजट प्रोजेक्ट) प्रचार और सोशल मीडिया की मदद से दर्शकों को आकर्षित करने की कोशिश कर रही थी, वहीं ‘कांतारा’ ने मुंहजबानी प्रचार के ज़रिए सिनेमाघरों तक दर्शकों की कतारें लगवा दीं।
SSKTK जहां दर्शकों को थिएटर तक खींचने में नाकाम रही, वहीं ‘कांतारा’ ने ग्रामीण और शहरी — दोनों ही वर्गों को अपनी ओर खींचा। सोशल मीडिया पर यूज़र्स लगातार कह रहे हैं कि ‘कांतारा फिल्म नहीं, अनुभव है।’
ट्रेड एनालिस्ट्स की राय
बॉलीवुड ट्रेड एनालिस्ट तरण आदर्श ने ट्वीट किया,
“कांतारा बॉक्स ऑफिस की सबसे बड़ी सरप्राइज़ पैकेज बनकर उभरी है। इसने दिखा दिया है कि जड़ से जुड़ी कहानियों की मांग हर समय बनी रहती है।”
वहीं, कुछ अन्य फिल्म विशेषज्ञों ने कहा कि यह फिल्म “हिंदी बेल्ट की थक चुकी स्क्रिप्ट्स को आईना दिखाने” का काम कर रही है।
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