IPL में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) की शानदार जीत से पूरे देश में क्रिकेट प्रेमियों में खुशी की लहर दौड़ गई। देशभर में इस जीत का जश्न मनाया गया, लेकिन बेंगलुरु में यह जश्न एक भयानक हादसे में बदल गया।
कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने RCB की जीत को अपनी जीत के तौर पर पेश करने की कोशिश की। मुख्यमंत्री, डिप्टी मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं ने इसे अपनी राजनीतिक उपलब्धि के रूप में दिखाने का प्रयास किया। मगर इस जश्न को सरकारी स्तर पर मनाने की व्यवस्था पूरी तरह से विफल रही।
चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर भगदड़, 11 लोगों की मौत
बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर जब लाखों लोग जमा थे, तब भगदड़ मच गई। उस वक्त स्टेडियम के बाहर करीब तीन लाख दर्शक मौजूद थे। सुरक्षा में लापरवाही के कारण लाठीचार्ज हुआ, कई लोग घायल हुए, छोटे बच्चों को कंधों पर उठाकर अस्पताल ले जाया गया।
डिप्टी मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ट्रॉफी लेकर राजनीतिक लाभ उठाने में लगे रहे, जबकि बाहर खौफनाक स्थिति बनी रही। भगदड़ में 11 लोगों की जान चली गई, जिनमें सबसे कम उम्र की दिव्यांशी महज 13 साल की थी। करीब 50 से अधिक लोग घायल हुए।
जिम्मेदारी किसकी? कोर्ट में राज्य सरकार ने RCB को बताया जिम्मेदार
कर्नाटक हाई कोर्ट ने इस हादसे का स्वतः संज्ञान लिया। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल ने कहा कि पूरा आयोजन RCB का था और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी RCB की थी। उन्होंने बताया कि 35 हजार क्षमता वाले स्टेडियम में ढाई लाख से ज्यादा लोग आ गए क्योंकि RCB ने प्रचार किया था कि वहां फ्री एंट्री होगी।
सरकार और IPL टीम पर जिम्मेदारी टालने की कोशिश
राज्य सरकार ने क्राउड मैनेजमेंट में खुद की कमियों को स्वीकार करने के बजाय टीम मैनेजमेंट और IPL की ओर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की। उन्होंने तर्क दिया कि सामान्य मैच में भीड़ संभालने के लिए 789 अफसर लगाए जाते हैं, जबकि इस दिन 1600 से ज्यादा अधिकारी मौजूद थे।
लेकिन कोर्ट के बाहर कई मंत्रियों ने सार्वजनिक रूप से माना कि सरकार की ओर से भी सुरक्षा व्यवस्था में कमियां रहीं।
यह घटना न केवल एक खेल जीत का जश्न था, बल्कि इसके साथ जुड़ी राजनीतिक हरकतों ने जश्न को एक दर्दनाक त्रासदी में बदल दिया। सवाल अब भी बरकरार है — आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है?
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