भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इन दिनों एक महत्वपूर्ण यात्रा पर ऑस्ट्रेलिया में हैं। यह दौरा केवल औपचारिक शिष्टाचार या कूटनीतिक मुलाकातों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है। इस दौरान दोनों देशों के बीच तीन प्रमुख रक्षा समझौते (Defence Agreements) पर हस्ताक्षर की पूरी संभावना है, जिनका असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
भारत-ऑस्ट्रेलिया: बढ़ता रणनीतिक सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और सामरिक सहयोग में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। क्वाड (QUAD) जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देश पहले ही एकजुट होकर काम कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय रक्षा साझेदारी को और सुदृढ़ करना, संयुक्त सैन्य अभ्यास को विस्तार देना, और रक्षा तकनीक के क्षेत्र में साझा प्रयासों को गति देना है।
ये हो सकते हैं तीन मुख्य रक्षा समझौते
सूत्रों के अनुसार, राजनाथ सिंह और ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स के बीच जिन तीन समझौतों पर सहमति बन सकती है, वे निम्नलिखित हैं:
लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट (LSA)
यह समझौता दोनों देशों की सेनाओं को एक-दूसरे के सैन्य अड्डों, डॉकयार्ड और सप्लाई बेस का इस्तेमाल करने की अनुमति देगा। इससे नौसेना की तैनाती और आपात स्थिति में सहयोग आसान होगा।
डिफेंस टेक्नोलॉजी को-डेवलपमेंट एंड ट्रांसफर एग्रीमेंट
इस समझौते के तहत रक्षा तकनीक के विकास और साझा उत्पादन पर सहयोग होगा। भारत ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर मिसाइल, ड्रोन और साइबर डिफेंस तकनीक जैसे क्षेत्रों में साझेदारी करेगा।
इंटेलिजेंस शेयरिंग एंड साइबर सिक्योरिटी कोऑपरेशन
बढ़ते साइबर खतरों के मद्देनज़र, यह समझौता दोनों देशों को आपसी खुफिया जानकारी साझा करने और साइबर हमलों से सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करेगा।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका
राजनाथ सिंह की यह यात्रा चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच भारत की “Act East Policy” और Hind-Pacific Strategic Vision के तहत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत चाहता है कि इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी रहे, और इसके लिए मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन जरूरी हैं।
भारत की वैश्विक रक्षा नीति को मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत को न केवल सैन्य दृष्टि से मजबूत बनाएगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी रणनीतिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। अमेरिका, जापान और फ्रांस के साथ पहले ही भारत के रक्षा समझौते हैं, और ऑस्ट्रेलिया के साथ गहराता यह संबंध एक और निर्णायक कड़ी जोड़ देगा।
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