बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के बीच गहरी दोस्ती थी।
लगभग 170 फिल्मों में काम करने के बाद जब राजेश खन्ना ने सिनेमा से धीरे-धीरे दूरी बनानी शुरू की, तो राजनीति में उनका प्रवेश राजीव गांधी के आग्रह पर हुआ।
1984 में कांग्रेस के लिए प्रचार करने के बाद, राजीव गांधी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए कहा, जिसे पहले तो उन्होंने टाल दिया। लेकिन एक मुस्कान ने सब बदल दिया।
🤝 “हम दूसरी बिरादरी से हैं”: जब खन्ना ने मना किया राजनीति में आने से
राजेश खन्ना ने एक पुराने इंटरव्यू में ‘लहरें रेट्रो’ को बताया,
“राजीव जी से मेरी दोस्ती इंदिरा गांधी जी के निधन के बाद और गहरी हो गई थी। मैं हर चुनाव में प्रचार करता था। लेकिन जब उन्होंने मुझसे सीधे चुनाव लड़ने को कहा, मैंने साफ कहा – हम दूसरी बिरादरी के लोग हैं, ये हमारा काम नहीं है।”
😊 “उनकी मुस्कान आज भी याद है, मना नहीं कर सका”
हालांकि जब दोबारा राजीव गांधी ने आग्रह किया, तो राजेश खन्ना नकार नहीं सके।
“राजीव जी की वो मुस्कान मुझे आज भी याद है। मैं मना नहीं कर पाया और दिल्ली से चुनाव लड़ा। जीतकर संसद में पहुंचा,” उन्होंने भावुक होकर कहा।
🎬 “बहुत फिल्में कर लीं, अब क्या?”
राजेश खन्ना ने यह भी बताया कि वह पहले ही काफी कुछ हासिल कर चुके थे।
“170 फिल्में कर चुका था। लगा अब और क्या करना है? बहुत हो गया। समय था आगे बढ़ने का।”
🏛️ पद या सत्ता नहीं, सेवा की चाह
हालांकि पार्टी ने उन्हें दोबारा लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने विनम्रता से इनकार कर दिया।
“मैंने कहा – लोकसभा हमारे बस की बात नहीं। अगर राज्यसभा में बैठकर देश की सेवा कर सकता हूं तो जरूर करूंगा। मुझे पद या सत्ता की परवाह नहीं, मुझे कांग्रेस की सेवा करनी है।”
🗳️ 1992 में सांसद बने, लेकिन एक्टिव पॉलिटिक्स में नहीं आए
राजेश खन्ना ने 1992 में नई दिल्ली से कांग्रेस के लिए उपचुनाव जीता और 1996 तक सांसद रहे।
इसके बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली, क्योंकि वह सिर्फ सेवा करना चाहते थे, राजनीति में पूरी तरह उतरना नहीं।
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