रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि यूक्रेन को लंबी दूरी के हथियार मुहैया कराने से पश्चिमी देशों के रूस-यूक्रेन संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होने का खतरा पैदा हो गया है।
रूसी मीडिया के मुताबिक पुतिन ने कहा कि ऐसे हालात में रूस नए खतरों के आधार पर “उचित फैसले” लेने के लिए मजबूर होगा।
पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यूक्रेन अपने पश्चिमी सहयोगियों से मिली मिसाइलों के इस्तेमाल के लिए परमिशन मांग रहा है। इनमें लंबी दूरी की मिसाइलें भी शामिल हैं, ताकि वह रूसी क्षेत्र में अंदर तक हमला कर सकें।
पुतिन ने रूसी सरकारी टीवी से कहा, “केवल नाटो देशों के सैन्यकर्मी ही इन मिसाइल प्रणालियों के लिए फ्लाइट असाइनमेंट कर सकते हैं । यूक्रेनी सैन्यकर्मी ऐसा नहीं कर सकते।” उन्होंने कहा, “इसलिए सवाल यूक्रेन को इन हथियारों के साथ रूस पर हमला करने की अनुमति देने का नहीं है। बल्कि यह है कि कि नाटो देश किसी सैन्य संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होते हैं या नहीं।”
रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “यदि यह निर्णय लिया जाता है, तो इसका अर्थ कुछ और नहीं बल्कि यूक्रेन युद्ध में नाटो सदस्यों – अमेरिका और यूरोपीय देशों – की प्रत्यक्ष भागीदारी होगी।”
पोलिटिको की एक रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस यूक्रेन को दिए अपने हथियारों के इस्तेमाल पर लगे प्रतिबंधों को कम करने की योजना को अंतिम रूप दे रहा है। इनमें रूस के अंदर हमला करने के लिए अमेरिकी पार्ट्स वाली लंबी दूरी की ब्रिटिश मिसाइलों का उपयोग भी शामिल है।
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