मणींद्र अग्रवाल को IIT कानपुर में निदेशक के तौर पर चुना गया है।आपको बता दें कि देश की छह आईआईटी के लिए नए निदेशक चुने गए है जिनमें से एक मणींद्र अग्रवाल भी है। इनको आईआईटी-कानपुर का निदेशक बनाया गया है। मणिंद्र ने 1982 में IIT कानपुर में कंप्यूटर साइंस के छात्र के तौर पर दाखिला लिया था उन्होंने कभी नहीं होगा की वह आज इसी संस्थान के निदेशक के पद के लिए चुने जाएंगे।
वह कोरोना काल में गणितीय मॉडल सूत्र की बात करे या फिर आईआईटी कानपुर मके द्वारा कृत्रिम वर्षा में योगदान की बात करे तो आपको बता दें कि प्रोफेसर मणीद्र अग्रवाल इन दोनो में पूर्ण योगदान रहा है। कोरोना महामारी के पैटर्न का आकलन करने वाले प्रोफेसर मणीन्द्र अग्रवाल को पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया है. वर्ष 1996 में IIT कानपुर में मणीन्द्र अग्रवाल कंप्यूटर साइंस में असिस्टेंट प्रोफेसर का पदभार संभाल रहे है। ये अपने शोध कार्यों के कारण हमेशा ही चर्चा में रहे है। इन्ही उपलब्धियों की वजह से साल 2013 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
कोरोना महामारी के दौरान वायरस की गतिविधियों को समझने के लिए प्रोफेसर अग्रवाल ने गणितीय सूत्र मॉडल को तैयार किया था, जिससे कोरोना लहर कितनी खतरनाक होगी इसको समझा जा सके।प्रोफेसर मणीन्द्र ने कई अन्य देशों के लिए भी कोरोना महामारी को लेकर स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी.
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