गर्भावस्था के दौरान शुगर लेवल का बढ़ जाना एक आम लेकिन गंभीर समस्या है। इसे गर्भकालीन डायबिटीज (Gestational Diabetes) कहा जाता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, समय पर नियंत्रण और सावधानी से माँ और बच्चे दोनों की सेहत को सुरक्षित रखा जा सकता है।
शुगर बढ़ने के लक्षण
गर्भवती महिलाओं में शुगर लेवल बढ़ने के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। आम लक्षणों में शामिल हैं:
बार-बार प्यास लगना
बार-बार पेशाब आना
थकान और कमजोरी
धुंधला दृष्टि
खानपान और डाइट
गर्भवती स्वास्थ्य विशेषज्ञ, बताती हैं कि सही खानपान से शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।
उच्च फाइबर वाला आहार: हरी सब्जियां, ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस।
प्रोटीन युक्त भोजन: दालें, अंडा, पनीर, चिकन।
फ्रूट्स सीमित मात्रा में: संतरा, सेब, पपीता, लेकिन अत्यधिक मीठे फल जैसे आम और अंगूर कम।
शुगर और जंक फूड से बचें: कोल्ड ड्रिंक, कैंडी, पैकेज्ड स्नैक्स।
छोटे और नियमित भोजन: दिन में 5-6 छोटे भोजन करने से ब्लड शुगर नियंत्रित रहती है।
जीवनशैली और व्यायाम
हल्का व्यायाम जैसे वॉक, प्रेग्नेंसी योग या स्ट्रेचिंग ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है।
पर्याप्त नींद और तनाव कम करने वाली गतिविधियां, जैसे ध्यान और प्राणायाम, मदद करती हैं।
डॉक्टर की सलाह से ही शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं।
मेडिकल देखभाल
नियमित रूप से ब्लड शुगर जांच आवश्यक है।
यदि डायट और व्यायाम से नियंत्रण नहीं होता, तो डॉक्टर इंसुलिन या अन्य सुरक्षित दवा निर्धारित कर सकते हैं।
समय पर चेकअप से गर्भकालीन जटिलताओं जैसे बच्चे का वजन ज्यादा होना, प्री-एक्लेम्पसिया या जन्मजात समस्याओं को रोका जा सकता है।
विशेषज्ञ की चेतावनी
डॉ. ने कहा, “गर्भावस्था में शुगर लेवल अनियंत्रित होने पर माँ और बच्चे दोनों को गंभीर जोखिम हो सकता है। इसलिए किसी भी तरह के लक्षण को अनदेखा न करें। हमेशा डॉक्टर की सलाह और नियमित मॉनिटरिंग जरूरी है।”
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