भजन सम्राट अनूप जलोटा एक ऐसे ऐतिहासिक मिशन पर कार्यरत हैं, जो भारतीय भक्ति संगीत को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिला सकता है। जलोटा ने घोषणा की है कि वे दुनिया भर से 500 भजन गायकों को एक ही मंच पर एकत्रित करने की अनूठी पहल का नेतृत्व कर रहे हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य न केवल भारतीय आध्यात्मिक संगीत को बढ़ावा देना है, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों और देशों की भ devotional परंपराओं को एक सूत्र में पिरोना भी है।
इस महायोजना के तहत अब तक 100 भजन गायकों की तलाश पूरी हो चुकी है, जिनमें भारत के विभिन्न राज्यों के प्रतिभाशाली कलाकारों के साथ-साथ अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, मॉरीशस, नेपाल और यूएई जैसे देशों के गायकों का चयन किया गया है। इन सभी कलाकारों ने भक्ति संगीत को अपनी जीवनशैली से जोड़ रखा है और लंबे समय से अपनी लोक परंपराओं व राग-रागिनियों के माध्यम से समाज में आध्यात्मिक संदेश फैलाते रहे हैं।
अनूप जलोटा का कहना है कि यह केवल संगीत का आयोजन नहीं, बल्कि “एक वैश्विक आध्यात्मिक संगम” है, जिसका उद्देश्य भजन परंपरा को नई पीढ़ी से जोड़ना है। जलोटा के अनुसार, “वर्तमान समय में भक्ति संगीत को संरक्षित करने की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है। तकनीक और नए मनोरंजन माध्यमों के बीच कई पारंपरिक कलाएँ धीरे-धीरे सीमित हो रही हैं। ऐसे में हमें अपनी जड़ों को संभालने और आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे।”
सूत्रों के अनुसार, यह आयोजन अगले वर्ष भारत के किसी प्रमुख शहर में किया जाएगा, जहाँ एक भव्य मंच पर सभी 500 भजन गायक एक स्वर में प्रस्तुतियाँ देंगे। कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत के दिग्गजों, आध्यात्मिक गुरुओं और विभिन्न देशों के सांस्कृतिक प्रतिनिधियों के शामिल होने की भी संभावना जताई जा रही है।
इस पहल को लेकर संगीत जगत में व्यापक उत्साह देखा जा रहा है। कई युवा कलाकारों ने इस मिशन को “अद्वितीय अवसर” बताते हुए कहा कि इससे उन्हें अपनी कला को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने का मौका मिलेगा। वहीं वरिष्ठ कलाकार इसे भक्ति संगीत के पुनरुत्थान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
अनूप जलोटा लंबे समय से भारतीय भजन और सूफी संगीत को दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने में सक्रिय रहे हैं। ‘जग में सुंदर हैं दो नाम’, ‘ऐसी लागी लगन’ और ‘मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो’ जैसे अनगिनत भजनों के माध्यम से उन्होंने एक वैश्विक पहचान बनाई है। इस नए मिशन के माध्यम से वे इस परंपरा को और अधिक व्यापक रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
दर्शकों और संगीत प्रेमियों का मानना है कि यदि यह आयोजन अपने तय स्वरूप में पूरा होता है, तो यह विश्व रिकॉर्ड बनाने के साथ-साथ भारतीय संगीत को एक नई ऊँचाई पर ले जाने का काम करेगा। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि शेष 400 भजन गायक कब और किन देशों से चुने जाएंगे तथा आयोजन की अंतिम घोषणा कब की जाएगी।
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