अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अगले हफ्ते एक महत्वपूर्ण मुलाकात होने की संभावना है, जिसमें यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने और शांति समझौते की दिशा में बातचीत होगी। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बताया कि यह मुलाकात ट्रम्प के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ की मॉस्को यात्रा के बाद प्रस्तावित है, जहां उन्होंने पुतिन से मुलाकात की थी। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब ट्रम्प ने रूस को 8 अगस्त तक शांति समझौते की दिशा में प्रगति करने या कठोर आर्थिक प्रतिबंधों का सामना करने की चेतावनी दी है। आइए जानते हैं, इस मुलाकात के मायने और इसके पीछे की पृष्ठभूमि।
मुलाकात की पृष्ठभूमि
रूस और यूक्रेन के बीच फरवरी 2022 से चल रहा युद्ध अब तक लाखों लोगों की जान ले चुका है और दोनों देशों की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रम्प, जो अपनी दूसरी पारी में युद्ध को जल्द खत्म करने का वादा कर चुके हैं, ने हाल के महीनों में पुतिन के साथ कई बार फोन पर बातचीत की है। हाल ही में, विटकॉफ की पुतिन के साथ मॉस्को में हुई तीन घंटे की बातचीत को ट्रम्प ने “बेहद सकारात्मक” बताया। इसके बाद ट्रम्प ने यूरोपीय नेताओं को सूचित किया कि वह पुतिन से व्यक्तिगत रूप से मिलने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ त्रिपक्षीय वार्ता की संभावना है।
हालांकि, इस मुलाकात के लिए कोई स्थान अभी तय नहीं हुआ है, और ट्रम्प ने शर्त रखी है कि पुतिन को जेलेंस्की से भी मुलाकात करनी होगी। जेलेंस्की ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “हमारा साझा रुख स्पष्ट है: युद्ध खत्म होना चाहिए, और यह एक न्यायपूर्ण अंत होना चाहिए।”
शांति वार्ता में चुनौतियां
पिछले कुछ महीनों में रूस और यूक्रेन के बीच तुर्की में तीन दौर की बातचीत हुई, लेकिन इनका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, सिवाय युद्धबंदियों की अदला-बदली के। रूस ने अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें यूक्रेन के चार क्षेत्रों से सैन्य वापसी और नाटो में शामिल होने की उसकी योजना को छोड़ना शामिल है। दूसरी ओर, जेलेंस्की ने रूसी सैनिकों की पूर्ण वापसी, युद्ध अपराधियों पर मुकदमा, और भविष्य में रूसी आक्रमण को रोकने के लिए सुरक्षा गारंटी की मांग की है।
पुतिन ने हाल ही में कहा कि वह एक “स्थायी और ठोस शांति” चाहते हैं, जो दोनों देशों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। हालांकि, विश्लेषकों का मानना है कि रूस की अधिकतमवादी मांगें और यूक्रेन का उनसे इंकार वार्ता को जटिल बना रहा है।
ट्रम्प की रणनीति और दबाव
ट्रम्प ने अपनी कूटनीति में आर्थिक दबाव का सहारा लिया है। उन्होंने रूस से तेल खरीदने वाले देशों, जैसे भारत, पर अतिरिक्त 25% टैरिफ की घोषणा की है, जो 27 अगस्त से लागू होगा। इसके अलावा, उन्होंने रूस पर नए प्रतिबंधों की चेतावनी दी है, अगर वह 8 अगस्त तक शांति की दिशा में कदम नहीं उठाता। ट्रम्प ने कहा, “मैं चाहता हूं कि लोग मरना बंद करें। अगर प्रगति नहीं हुई, तो मैं पीछे हट सकता हूं।”
हालांकि, यूक्रेन और यूरोपीय नेता चाहते हैं कि अमेरिका वार्ता में सक्रिय भूमिका निभाए और रूस पर दबाव बनाए रखे। जेलेंस्की ने चेतावनी दी है कि अगर रूस युद्धविराम का सम्मान नहीं करता, तो कठोर प्रतिबंध जरूरी होंगे।
यूरोप और वैश्विक प्रतिक्रिया
यूरोपीय नेताओं, जैसे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, ने ट्रम्प के प्रयासों का समर्थन किया है, लेकिन वे एक स्थायी शांति के लिए अमेरिकी सुरक्षा गारंटी की मांग कर रहे हैं। स्टारमर ने कहा कि वह यूक्रेन में शांति स्थापना के लिए ब्रिटिश सैनिकों को तैनात करने के लिए तैयार हैं, बशर्ते यह युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करे।
वहीं, रूस ने पहले के समझौतों, जैसे 1994 के बुडापेस्ट मेमोरेंडम, को अमान्य करार दिया है, जिससे यूक्रेन और पश्चिमी देशों में अविश्वास बढ़ा है।
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