“अनार सौ रोग हरे” — यह कहावत हम सबने सुनी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ अनार का रस ही नहीं, उसका छिलका भी औषधीय गुणों से भरपूर होता है? आयुर्वेद के जानकारों और आधुनिक हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सर्दियों में अगर आप अनार के छिलके का सही तरीके से सेवन करें, तो सर्दी, खांसी, गले की खराश और पेट संबंधी समस्याओं से राहत मिल सकती है।
शहरी जीवन में अक्सर हम फल खाने के बाद उनके छिलके फेंक देते हैं, लेकिन यह आदत बदलने की जरूरत है — खासकर तब जब बात अनार के छिलके की हो।
सर्दी-खांसी में कैसे असर करता है अनार का छिलका?
अनार के छिलकों में मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-वायरल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं। आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार, यह छिलका विशेष रूप से गले की खराश, सूखी खांसी और कफ को कम करने में कारगर है।
आयुर्वेद विशेषज्ञ बताती हैं, “अगर अनार के छिलकों को सुखाकर उसका पाउडर बना लिया जाए और इसे शहद के साथ सेवन किया जाए, तो यह प्राकृतिक कफ सिरप की तरह काम करता है।”
अनार के छिलके में छिपा पोषण
अनार के छिलके में पॉलीफेनॉल्स, फ्लैवोनॉयड्स, टैनिन्स और विटामिन C की भरपूर मात्रा पाई जाती है। ये सभी तत्व शरीर में संक्रमण से लड़ने, इम्यून सिस्टम को मज़बूत करने और कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त होने से बचाने में मदद करते हैं।
कैसे करें इस्तेमाल?
सूखे छिलके का पाउडर:
छिलकों को धूप में सुखाकर मिक्सी में पीस लें। इस पाउडर को शहद या गर्म पानी के साथ लें। दिन में एक बार सेवन काफी है।
छिलके की काढ़ा चाय:
कुछ सूखे छिलके पानी में उबालें, उसमें तुलसी या अदरक मिलाएं। यह चाय गले की खराश और खांसी में राहत देती है।
गर्गल (कुल्ला):
अनार के छिलके का काढ़ा बनाकर गुनगुने पानी से गरारा करें। इससे टॉन्सिल की सूजन और गले की खराश में फायदा होता है।
ध्यान देने योग्य बातें
छिलकों को धोकर ही सुखाएं ताकि कीटाणु न रहें।
बहुत अधिक मात्रा में सेवन करने से कब्ज हो सकती है।
गर्भवती महिलाएं और छोटे बच्चे डॉक्टर की सलाह से ही इसका सेवन करें।
यह भी पढ़ें:
दूध के साथ भूलकर भी न खाएं ये चीजें, वरना हो सकता है बड़ा नुकसान
Navyug Sandesh Hindi Newspaper, Latest News, Findings & Fact Check